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प्रांतीय वित्तव्यवस्था का स्वरूप

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को उतनी गम्भीरता से लेंगे जितनी गम्भीरता से उनके प्रवर्त्तक इन्हें लाये थे। फिर भी यह बड़ी विचित्र बात है कि दोनों आयोगों में से किसी ने उनके औचित्य पर आपत्ति नहीं की। विकेन्द्रीयकरण ख्1, सम्बंधी रॉयल आयोग ने अवश्य यह स्पष्ट किया, यद्यपि जोरदार ढंग से नहीं, कि समान अंशदान अनिवार्य रूप से न्यायसंगत अंशदान नहीं थे, लेकिन न तो इस आयोग ने और न ही भारतीय व्यय सम्बंधी रायल आयोग ने उस भाषा को चुनौती दी जिसमें कहा गया था कि प्रांतीय सरकारें अपनी सेवाओं के लिए भुगतान करने के पश्चात् अपना राजस्व साम्राज्यिक राजकोष में अंशदान के लिए दे दें। अतः यह और भी आवश्यक हो जाता है कि उन कारणों पर कुछ विचार से विचार किया जाए जिनमें इस दृष्टिकोण का समर्थन किया गया कि यह व्यवस्था में साधनों के पृथक्करण तथा आय से अंशदान का सिद्धांत पर आधारित है। वास्तव में अंशदानों के औचित्य के प्रश्न पर तब तक विचार करने का कोई फायदा नहीं है जब तक यह तय नहीं हो जाए कि राजस्व प्रांतीय सरकारों के थे जिन्हें वे अपना कह सकती थीं और ऐसी सेवाएं थीं जिनको सुचारू रूप से चलाने के लिए मुख्य रूप से वे जिम्मेदार थीं।

इस बात का निर्णय किस आधार पर किया जाए कि क्या प्रांतों के पास ऐसा राजस्व और सेवाएं थीं जिनको वे अपनी कह सकते थे? निस्संदेह प्रशासनिक मापदण्ड के आधार पर यह कहा जा सकता है कि जिस चीज पर प्रांत का प्रशासन था वह प्रांतीय थी। लेकिन यह मापदंड अंतिम मापदंड नहीं हो सकता। इसका कारण यह है कि प्रशासनिक राज्यतंत्रों के उद्गम या आदर्श संगठन में उनकी स्थिति के बारे में जो भी राय हो, फिर भी आधुनिक समय में एक प्रशासनिक राज्यतंत्र के सभी प्रादेशिक अधिकारों का मुख्य रूप से किसी सामाजिक समझौते या कुछ कृत्यों के निर्वहन की वजह से नहीं अपितु एक सामान्य सिद्धान्त के आधार पर प्रयोग किया जाता है। अतः इस प्रश्न का निर्णय उस विधि के आधार पर किया जाना चाहिए जिससे ब्रिटिश भारत में प्रांतीय सरकारों की स्थिति का निरूपण किया गया है।

क्या प्रांतों का कानूनी दृष्टि से राजस्व पर कोई अधिकार था? यद्यपि यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि जो लोग प्रांतीय राजस्व की बात करते थे उन्होंने प्रांतीय शब्द को कोई कानूनी दर्जा दिया था या नहीं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि आमतौर पर बोलचाल में इसने यह अर्थ ग्रहण कर लिया था। प्रांतीय

  1. देखिए विकेन्द्रीयकरण सम्बन्धी रायल आयोग का प्रतिवेदन।