ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रशासन और वित्त प्रबंध - Page 25

10 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सैनिक कार्यवाही तथा कार्य व्यापार का जैसा कि उसके बाद निदेशित किया

गया, की निगरानी, निर्देशन तथा नियंत्रण करना।

उक्त बोर्ड के सभी सदस्यों को जब भी वे समस्त सुविधाजनक समय में चाहें उपरोक्त यूनाइटेड कंपनी के सभी कागजात अथवा दस्तावेज को देखने का अधिकार और उनके द्वारा मांगे जाने पर उन दस्तावेजों की प्रक्रिया प्रस्तुत की जाती है। कोर्ट के निदेशकों और कंपनी के विशेष कोर्ट के मालिकों की सामान्य अथवा विशेष कोर्टों, तथा ईस्ट इंडीज में ब्रिटिश अधिकृत क्षेत्र (उपनिवेश) के असैनिक एवं सैनिक (सिविल तथा मिलिट्री) सरकार एवं उसके राजस्व संबंधी कोर्ट के निदेशकों की सभी कार्यवाही वृत्तान्त, आदेश, संकल्प तथा अन्य कार्यवाही की प्रतियां इन कोर्टों की बैठकों के 8 दिन के भीतर बोर्ड के सम्मुख प्रस्तुत करने का निदेश है तथा ईस्ट इंडीज में कंपनी के कर्मचारियों से निदेशकों को प्राप्त एवं प्रेषित पत्रों, आदेशों और अनुदेशों की प्रतियां तुरंत बोर्ड के सम्मुख प्रस्तुत की जाएंगी। कोर्ट के निदेशकों से अपेक्षा की जाती है कि वे बोर्ड से समय-समय पर प्राप्त ईस्ट इंडीज क्षेत्र में ब्रिटिश अधिकृत क्षेत्र के असैनिक एवं सैनिक (सिविल तथा मिलिट्री) सरकार अथवा राजस्व संबंधी आदेशों तथा निर्देशनों का विधिवत पालन करेंगे।’’

‘‘जब भी निदेशक मंडल (कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स) किसी भी विषय पर बोर्ड द्वारा प्रेषित अभीष्ट प्रेषण (डिसपैच) के अनुपालन की अवहेलना करता है तब मांगपत्रक के चौदह दिनों के अंतर्गत, बोर्ड के लिए यह वैध है कि वह निदेशकों को कोई आदेश अथवा अनुदेश उपरोक्त निदेशक मंडल (कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स) द्वारा प्रेषण की प्राप्ति की प्रतीक्षा किए बगैर ईस्ट इंडीज में ब्रिटिश भूभाग और अधिकृत क्षेत्र के अंतर्गत असैनिक अथवा सैनिक (सिविल अथवा मिलिट्री) सरकार विषयक पूर्वोक्त किसी भी सरकार अथवा प्रेसीडेंसी को अनुपालन हेतु तैयार करे और प्रेषित करे, निदेशकों से आशा की जाती है कि वे निर्धारित प्रपत्र में (उन तथाकथित आदेशों और अनुदेशों को जो उन्हें प्रेषित किए गए हैं उसकी अवधि के अंतर्गत) प्रेषण वापिस भेजें, भारत स्थित संबंधित सरकारों और प्रेसीडेंसियों को जब तक कि निदेशकों ने बोर्ड को कोई मांग पत्र प्रस्तुत न किया हो जो इन आदेशों या अनुदेशों से संबंधित हैं, तो ऐसी अवस्था में बोर्ड उनमें संशोधन कर सकेगा, और इन निर्देशों को निदेशक मंडल (कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स) मनाने के लिए बाध्य होगा।’’

बोर्ड ऑफ कंट्रोल (नियंत्रण मंडल) छह विभागों में विभाजित था और इसके कार्यक्षेत्र में थे (i) लेखा (ii) राजस्व (iii) न्याय (iv) सैनिक (v) गोपनीय, और राजनीतिक (vi) विदेश और नागरिक विभाग।