प्रांतीय वित्तव्यवस्था का विस्तार
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में नियंत्रण प्राधिकारी होना चाहिए जो उस देश के प्रशासन से संबंधित हों परन्तु समान रूप से यह पूछना तर्कसंगत था कि केन्द्र और प्रांतीय सरकारों के बीच सौहार्द के हितों के लिए यह संभव नहीं होगा कि प्रांतों की वित्तीय शक्तियों के प्रतिबंधों को शिथिल किया जाता क्योंकि उनके द्वारा वे अपने उत्तरदायित्व को उचित रूप से निभाने के लिए परस्पर विरोधी नहीं होंगे। यह संभव था कि भारत सरकार की स्थिति को हानि पहुंचाए बिना परिस्थितियों की शिथिलता द्वारा प्रांतीय वित्तव्यवस्था का विस्तार किया जाए और इसके बारे में प्रांतीय सरकारों द्वारा दिए गए सुझावों के आगे दिए गए विश्लेषण से स्पष्ट है। ये सुझाव इस प्रकार थेःµ
प्रांतीय राजस्व की सुरक्षा के लिए कराधान और ऋण लेने की शक्ति।
भारत सरकार द्वारा स्वीकृत शक्ति से अधिक सीमा तक कर्मचारियों और
स्थापनाओं के व्यय को स्वीकृति प्रदान करने की शक्ति।
प्रांतीय अनुमानों को साम्राज्यवादी बजट और लेखाओं से अलग किया जाना।
राजस्व और व्यय के अलग-अलग शीर्षों की पद्धति का उन्मूलन तथा
इसके स्थान पर उत्पादन से स्रोतों और अंशदान को अलग करने की पद्धति
प्रतिस्थापित करना।
- निर्दिष्ट राशि तक अपनी शेष राशियों से व्यय करने की शक्ति जिसके
लिए भारत सरकार की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है ताकि बजट
अनुमानों से अधिक व्यय किया जा सके।
इन मांगों की स्वीकृति के लिए भारत सरकार के संवैधानिक उत्तरदायित्वों के दृष्टिकोण से क्या आपत्तियां थीं? स्पष्टतया भारत सरकार के लिए यह संभव था कि वह प्रांतीय कर निर्धारण तथा साम्राज्यवादी करों से असंबद्ध सबसे उपयुक्त कराधान के कतिपय स्रोतों को सुस्पष्ट कर देती। इसी प्रकार प्रांतीय सरकारों को यह अनुमति देना संभव था कि वे उनको सौंपे गए राजस्व की जमानत की एक सीमा तक ऋण ले सकें। भारत सरकार ने यह सुझाव दिया था कि प्रांतीय सरकारें इन शक्तियों का दुरुपयोग करेंगी तथा वे अपनी वित्तीय पद्धति की स्थिरता को क्षतिग्रस्त करेंगी अथवा असंतोष की भावना फैला देंगी। इस कथन से भारत सरकारर का यह विश्वास था कि प्रांतीय सरकारों को विधि समान राजनीतिक इकाइयां स्वीकार करने से ऐसा लगता था कि उनका प्रशासन ऐसे अक्षम प्रशासक करते हैं जो अपने दायित्वों के प्रति उदासीन हैं। दूसरी मांग अधिक सरलता से स्वीकार की जा सकती थी। यह ध्यान देने योग्य बात है कि देश की सिविल सर्विस राजस्व और सामान्य प्रशासन का कार्यभार संभालती है और इस देश सेवा को निम्न प्रकार विभाजित कर दिया गया थाःµ