9 प्रांतीय वित्त व्यवस्था का विस्तार - Page 259

244 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. इंडियन सिविल सर्विस की भर्ती इंग्लैंड में प्रतियोगिता की परीक्षा द्वारा की

जाती है जिसमें भारत के देशी लोग, महामहिम की अन्य प्रजा के समान

प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं, और

  1. प्रांतीय और अधीनस्थ सिविल सेवाओं की भर्ती भारत में की जाती है और

नियमानुसार यह प्रतियोगिता ऐसे व्यक्तियों के लिए खुली है जो इस देश

के निवासी हैं इस देश में अधिकारी हैं। प्रत्येक प्रांत की अपनी अलग

‘‘प्रांतीय’’ और ‘‘अधीनस्थ’’ सेवाएं होती हैं। परन्तु जब वह दूसरे प्रकार

की सेवाओं में भर्ती के लिए स्वतंत्र है वहां प्रथम प्रकार की नियुक्तियों के

नियम भारत सरकार द्वारा निर्धारित किए जाते हैं। यदि ऐसी स्थिति है तो

वह बात सार्थक होगी कि भारत सरकार जिसे नियुक्ति के लिए भर्ती करने

की शक्ति है वेतन को नियमित करने की शक्ति भी रखेगी। इसमें कोई

कारण नहीं हो सकता कि समान वेतन मान के पदों के वेतन सभी प्रांतों में

क्यों न समान होने चाहिए, प्रांतों की आर्थिक स्थिति के अंतर के होते हुए

ये समान भी नहीं हो सकते। स्थानीय सरकार स्थानीय व्यक्ति का आर्थिक

मूल्य अधिक अच्छा समझती है तथा प्रांतीय और अधीनस्थ सेवाओं द्वारा

आवृत सीमा तक की शक्तियों से विश्वसनीय मानती है। भारत सरकार ने

यह सुझाव दिया है कि इस प्रकार की शक्तियों की स्वीकृति से किसी

प्रांत के आवर्ती व्यय में काफी वृद्धि होगी। भारत सरकार के इस सुझाव

को गंभीर रूप से कठोर कहा जाना चाहिए।

तीसरी सिफारिश भारत सरकार के उत्तरदायित्व को किसी भी विचार की दृष्टि से प्रभावित नहीं कर सकी। भारत सरकार ने केवल यह आपत्ति उठाई कि इस प्रकार का अलगाव बुद्धिसम्मत नहीं होगा। ऐसी साम्राज्यवादी सरकार के लेखाओं अथवा अनुमानों के प्रकाशन से जनता को गुमराह किया जाएगा तथा भारत सरकार की वित्तीय स्थिति का पूर्णतया अपूर्ण विचार प्रस्तुत होगा जबकि इनमें प्रांतीय सरकारों के लेखाओं को स्थान नहीं दिया गया है तथा इतने विशाल क्षेत्र में जोड़ी जाने वाली मदों को निकाल दिया गया है। ख्1, जब यह बात स्वीकार की जानी चाहिए यदि लेखाओं का ऐसा पृथक्करण जांच को बचा सका तथा प्रांतों द्वारा बजट निर्माण में बाद में बाधा डाल सका तो उसे ऐसा नहीं करना था कि प्रांतीय सरकारों की प्रशासकीय सुविधा से ऊपर लेखाओं के विद्यार्थी की तथाकथित सुविधा रखी जाती। इसके अलावा इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह प्रस्ताव नवीन नहीं था। यह एक ऐसी प्रथा का पुनः स्थापना ही करना था जो 1871 और 1877 के बीच की अवधि में प्राप्त हुई। वित्तीय विकेन्द्रीयकरण की अवधि में प्रांतीय आंकड़े साम्राज्यवादी बजट में नहीं दर्शाए गए। महालेखाकार द्वारा निर्मित प्रांतीय बजट प्रांतीय सरकार द्वारा पारित किया

  1. आर.सी.डी., मिट. ऑफ एविड, खंड 10, क्यू. 44866, 45179-180