ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रशासन और वित्त प्रबंध - Page 27

12 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सकता था। वह देशी राज्यों के लिए रेजीडेंटों तथा गैर नियमित प्रांतों में कमिश्नरों की नियुक्ति सहित सभी राजनीतिक नियुक्तियां करता था। वह बंगाल तथा उत्तर पश्चिमी प्रांतों के लैफिटनेंट गवर्नर की नियुक्ति करता था तथा वह छोटी अदालतों के न्यायाधीशों की भी नियुक्ति करता था और बंगाल तथा उत्तर पश्चिमी प्रांतों में सैन्य संरक्षण को भी नियंत्रित कर सकता था।

वे सभी जिले जो अधीनस्थ चारों सरकारों की सीमाओं में नहीं आते थे, गवर्नर जनरल इन काउंसिल के सीधे अधिकार क्षेत्र में आते थे। गवर्नर जनरल इन काउंसिल अपनी उन सभी शक्तियों का प्रयोग देशी राज्यों पर भी कर सकता था जो उसे समझौते के तहत प्राप्त थे। गवर्नर जनरल का कार्यालय चार विभागों में विभक्त था। प्रत्येक विभाग का प्रभारी सचिव होता था। ये विभाग इस प्रकार थेµ

  1. विदेशी विभाग (देशी रियासतों के संबंध में विदेश)

  2. गृह विभाग, न्यायिक तथा राजस्व पत्राचार का नियंत्रण

  3. वित्त विभाग

  4. सैन्य (मिलिट्री) विभाग

इसके अलावा राजनैतिक तथा वित्त सचिवों का अपना गोपनीय विभाग होता था जिनको गोपनीय संप्रेषण सौंपा गया था।

मद्रास तथा बंबई की अधीनस्थ सरकारों का प्रशासन इस प्रकार चलाया जाता थाµप्रत्येक का एक गवर्नर होता था तथा तीन सदस्य वाली (प्रधान सेनापति सहित) परिषद् (काउंसिल) होती थी। गवर्नरों तथा पार्षदों (काउंसिलरों) की नियुक्ति निदेशकों की कोर्ट द्वारा की जाती थी। बंगाल तथा उत्तर पश्चिमी प्रांतों में लेफिटनेंट गवर्नरों का शासन होता था। जिनकी नियुक्ति गवर्नर जनरल द्वारा की जाती थी। अधीनस्थ सरकारों को विधान बनाने अथवा नए कार्यालयों का सृजन करने का अधिकार नहीं था और ना ही उन्हें काउंसिल में भारत के गवर्नर जनरल की पूर्व अनुमति बिना ‘‘वेतन, उपदान अथवा भत्ते’’ देने का अधिकार था। ऐसा कठोर नियम यद्यपि कानूनी तौर से अपेक्षित था लेकिन प्रथा से नहीं। गवर्नर जनरल पर अधिक भार न पड़े इसके लिए छोटे-छोटे मामले गवर्नर द्वारा ही निष्पादित किए जाते थे जो उसकी त्रैमासिक रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजते थे जो इनकी समीक्षा कर वास्तव में स्वीकृत करते थे। बंबई तथा मद्रास की सरकारों को कोर्ट के निदेशकों से सीधा पत्राचार करने का अधिकार था और वे अपनी कार्यवाही के सारांश कोर्ट तथा भारत सरकार को भेजते थे। भारत