ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रशासन और वित्त प्रबंध - Page 28

ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रशासन और वित्त प्रबंध 13

सरकार के दस्तावेज सिविल (प्रतिज्ञाबद्ध तथा गैर-प्रतिज्ञाबद्ध), सैनिक (मिलिट्री), नौसेना तथा धार्मिक सेवाओं द्वारा प्रस्तुत किए जाते थे। राजस्व का संग्रह तथा न्यायिक प्रशासन का भार सिविल सेवाओं को सौंपा गया था।

सिविल तथा मिलिट्री में भर्ती करने के लिए इंग्लैंड में कंपनी ने हैलवर्ग कॉलेज तथा ऐडिस्कोम्बे अकेडेमी नामक दो कॉलेज चला रखे थे। कंपनी प्रत्येक विद्यार्थी पर प्रशिक्षण अवधि के दौरान, प्रति वर्ष लगभग 96 पौंड खर्च करती थी।

सर्वोच्च भारत सरकार के नाम पर यह सारा राजस्व एकत्रित किया जाता था और इसे सर्वोच्च कोष में जमा कर दिया जाता था और यही कोष इसका नियंत्रण करता था।

स्थानीय राजस्व स्वायत्तता का पूर्णतः अभाव था। एक प्रांत का घाटा दूसरे की बेशी से पूरा किया जाता था और समस्त भारत के राजस्व को एक विशेष प्रांत में लड़ाई के लिए उधार लिए कर्जे के प्रति उत्तरदायी माना जाता था_ संक्षेप में वित्त और प्रशासन दोनों पूरी तरह केन्द्रीकृत थे जैसा कि प्राचीन फ्रांस के शासन में होता था।

विशुद्ध शासन प्रणाली के विषय में इतना पर्याप्त है। इसकी विवेचना हम यहीं स्थगित करते हैं और दूसरे अध्याय पर आते हैं।

अंतिम अध्याय में यह बात स्पष्ट उभर कर आती है कि पश्चिम यूरोप किस प्रकार और क्यों भारत पर नियंत्रण के लिए जीजान से जुटा हुआ था। विभिन्न राष्ट्रों के विभिन्न सेनापतियों (नायकों) की सेनाओं ने एक देश के निवासियों पर आधिपत्य जमाने के लिए जिन्हें अपनी अंतिम नियति चुनने का अधिकार प्राप्त नहीं थाµकामा, एलबुकर्कों, बसियों, लल्लीयों, क्लाइवों और मैलकामों, झीलों और समुद्र तटों को लांघती हुई जैसे भूतों की एक रेलगाड़ी बैन्कुओ की पटरी पर दौड़ रही हो जिसने शेक्सपीयर की कल्पना के मैकबैथ को भयभीत कर दिया था उसका हमें आभास होता था।

II

इस अध्याय में हम विशेषतया ईस्ट इंडिया कंपनी का बतौर सर्वोच्च राजनीतिक प्रभुसत्ता और उसकी वित्तीय व्यवस्था का अध्ययन करेंगे इस विशद् व्याख्या को अलग रखते हुए कि वह एक व्यापारिक संस्थान से राजनीतिक प्रभुसत्ता कैसे बन गई। इस तथ्य में यह कोई आश्चर्य की बात नहीं कि ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में साम्राज्यवाद स्थापित करने में सफल हो गई थी जिसका कि पहले वर्णन किया जा चुका है। विभिन्न प्रांतों में अपनी जड़ जमाने के पश्चात् इसने पूरे प्रायद्वीप (पेनिनसुला) में अपना राज्य कायम कर लिया और कानूनन जिसे भारत में ब्रिटिश राज की संज्ञा दी गईः दूसरे शब्दों में इसने एक राज्य स्थापित कर