256 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
वैयक्तिक कानून ख्6, के संरक्षण के लिए कार्यपालिका के संबंध में ऐसा धार्मिक आदर रहा कि कुछ भी तथ्य क्यों न हो इससे नागरिकता के सबसे प्रारंभिक अधिकारों का आनंद उठाने से लाखों लोगों को वंचित कर दिया और इस बात में सावधानी रखी गई कि संघर्ष के मामलों में नागरिक कानून के तर्कसम्मत उपबंधों की अनुमति नहीं दी गई ताकि उस पुरातन संहिता की अतार्किक व्यवस्थाओं का अनुसरण किया जाए अथवा उनका दमन किया जाए। यदि विधायिका के आधुनिक मानक से जांच की जाए तो कार्यपालिका को अत्यंत रूढि़वादी कहा जाएगा। आर्थिक अधिकारों के प्राप्त करने के मामले में इसका प्रत्युत्तर अधिक धीमी गति का था और कृषि संबंधी ख्7, अवधि की सुरक्षा अथवा स्थायित्व प्रदान करने अथवा औद्योगिक ख्8, जनता की सरलता तथा सुविधा के लिए जो विधान अपनाए गए और वह विधान उसकी तुलना में समाप्त हो गए जिसने औद्योगिक दासता से बचाने के लिए अपने प्रयोग का निषेध ख्9, कर दिया था।
इसकी वित्तीय पद्धति भी इसी प्रकार वर्गीकृत की गई कि आम जनता पर कर लगा कर शांति और व्यवस्था स्थापित की जाए तथा उच्च वर्ग के लोगों को कर
- सती प्रथा को हटाने के लिए 1829 का बंगाल रेग्यूलेशन, 1843 का एक्ट, ‘‘5’’, दासता निवारण के
लिए, (1850 का एक्ट 21) 1832 को रेग्यूलेशन 7 की धारा को पुनः कानून बनाने के लिए) जाति
या धर्म की हानि के फलस्वरूप अधिकारों या सम्पत्ति के जब्त होने से वर्जित करने के लिए, 1856
का एक्ट 15 जिसने हिंदू विधवाओं को पुनः विवाह के लिए प्राधिकृत किया, 1866 का एक्ट 11
जिसने ईसाई धर्म में परिवर्तित देशी लोगों को तलाक पाने का अधिकार दिया, 1871 का एक्ट 27
जिसने अस्वाभाविक प्रथाओं को सीमित किया, 1872 का एक्ट 3 जिसने, उन सभी लोगों के विवाह
की व्यवस्था की जो ईसाई, यहूदी, हिंदू, मुसलमान, जैन अथवा सिख नहीं हैं।
- यह सर्वप्रथम 1772 में वारेन हेस्टिंग्स द्वारा स्वीकार किया गया तथा इसे 1780 के ईस्ट इंडिया कंपनी
एक्ट (2) जी.ई.ओ. III, सी 70 एस.एस. 17 और (18) में सम्मिलित किया गया, इन उपबंधों को
बाद के कानूनों में सम्मिलित किया गया।
- देखिए 1865 के इंडियन सक्सेशन एक्ट में वैयक्तिक कानून के पक्ष में उपबंध और 1882 का ट्रांसफर
प्रापर्टी एक्ट तथा 1882 का इंडियन ट्रस्ट एक्ट में वैयक्तिक कानून के पक्ष में उपबंध। 7. देखिए बंगाल में 1859, 1868, 1881 और 1885 का टेनेंसी एक्ट, बम्बई में 1879 का दक्कन एग्री
कल्चरिस्ट रिलीफ एक्ट और यू.पी. में 1868 का अवध रेंट एक्ट, 1883 का सेंट्रल प्राविंसेज टेनेंसी
एक्ट।
- 1881 तक भारत में फैक्ट्री एक्ट शुरू नहीं हुआ। 1891 में 1881 का एक्ट संशोधित हुआ और इसके
स्थान पर 1911 में दूसरा एक्ट लागू किया गया जिसमें भारत में कारखानों के मजदूरों को प्रशासित
करने वाली शर्तों का उल्लेख था।
- भारतीय आर्थिक समस्याओं के विद्यार्थियों को यह लाभ होगा कि इसका संदर्भ अनुबंधित मजदूरों की
निंदात्मक पद्धति से है।