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264 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

राजादेश और किलेबंद घर (बेस्टील) के इस शासन की कठोरता इन दमनकारी कानून को लागू करने के लिए किए गए अतिक्रमण हेतु कार्य-पालिका की ओर से किसी भी उत्तरदायित्व के भय से कोई समझौता न करने वाली थी। इस बात पर ध्यान दिया जाना है कि कार्यपालिका को कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों की स्वंत्रता के दमन हेतु इन विवेकाधीन शक्तियों को अधिक दिए जाने की स्थिति के साथ इन शक्तियों के निभाने के लिए अपने एजेंटों को मुक्त करने के समान उदार साधन की भेंट मिली हुई थी। ख्2, पुलिस अधिनियमों और प्रेस अधिनियमों आदि में से ऐसे सभी उपबंध समाहित थे जिससे इन अधिनियमों के लागू किए जाने में अवरोध का निवारण करने हेतु इन एजेंटों के विरुद्ध नागरिक न्यायालय (सिविल कोर्ट) में सभी कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। उपद्रवों के दमन में भाग लेने वाले अधिकारी और सैनिक सद्भाव के किए गए कार्यों के लिए आपराधिक रूप से उत्तरदायी नहीं और सरकार के आदेश के बिना अन्य कार्यों में भी उन पर मुकदमा नहीं चलाया जाता था। ख्3, इस प्रकार उच्च कार्यकारी अधिकारियों पर ऐसे अपराधों के लिए मुकद्दमे नहीं चलाए जा सकते थे जो अपराध लोक कार्यों के निभाने में हो जाते थे किन्तु प्रतिबंध यह था कि मुकदमे चलाने के लिए सरकार की अनुमति आवश्यक है और इसके बाद सरकार द्वारा प्रस्तावित तरीके से ही मुकदमे चलाए जाते थे। ख्4, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि यदि इस प्रकार की विवेकाधीन शक्तियां विधिबाह्य ढंग से काम में लाई जाती थीं तो इनमें से शांति का शासन आतंक के शासन में बदल जाता था।

परन्तु इस बात का शीघ्र ही पता लग गया कि देश में सरकार के चलाने के लिए ऐसे बल का कोई विश्वसनीय साधन नहीं था। बर्क ख्5, ने इस ऐतिहासिक निर्णय का सारांश दिया जो इस प्रकार हैःµ

‘‘बल प्रयोग अस्थाई है। इससे कुछ समय के लिए शांति हो सकती है परन्तु

इससे शांति की आवश्यकता को हटाया नहीं जा सकताः किसी देश पर शासन

नहीं किया जाता है जिसे लगातार जीता जाए। बल्कि इस संबंध में दूसरी आपत्ति

अनिश्चितता की है। आतंक में सदैव बल का प्रभाव नहीं होता है और हथियारों

से विजय प्राप्त नहीं होती है, यदि आपको सफलता प्राप्त नहीं होती तो आप

  1. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 108 और 144 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120 ए और बी,

124 ए और 153 ए

  1. एन, घोष, सामने के पृष्ठ का उद्धरण, पृष्ठ 601

  2. दंड प्रक्रिया संहिता अधिनियम 6, 1898, अध्याय 9 धारा 128, 130 और 132

  3. वही, धारा 197

  4. अमरीका के साथ समझौता करने के संबंध में भाषण।