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280 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

निरंतर और ईमानदारी से सूचित करती रहे जो उसके मत के अनुसार सरकार को रिपोर्ट किए जाने चाहिए अथवा जिसके लिए भारत सरकार को सूचना की आवश्कयता हो। इसका कारण यह था कि कानून के अंतर्गत प्रत्येक प्रांतीय सरकार अपने से संबंधित सभी मामलों में अधीक्षण, निर्देश और नियंत्रण की दृष्टि से भारत सरकार के अंतर्गत रखी गई थी। भारत सरकार का प्रशासकीय नियंत्रण उस सरकार द्वारा एकरूपता के हित में कार्यान्वित किया जाता था। यह स्पष्ट है कि कई मामलों में भारत एकता और अखंडता की दृष्टि से अविभाजित देश है जहां अधिकांश कार्य एकरूपता के आधार पर सम्पन्न किया जाता है। भारत सचिव (सेक्रेटरी ऑफ स्टेट) द्वारा दी गई शर्तों पर इंग्लैंड से जो सिविल कर्मचारी नियुक्त किए गए थे उन्होंने प्रांतीय सरकारों के आदेशों को कार्यान्वित किया परन्तु उन्हें प्रभावित करने वाले कई प्रश्न प्रांतीय सरकार द्वारा निर्धारित नहीं हो सके। इसके अलावा भारत भर में व्यापार, उद्योग और विज्ञान के विकास को दृष्टिगत रखते हुए भारत सरकार ने समरूप नीतियों के निर्माण तथा कार्यान्वयन का पक्ष लिया। यहां तक कि समग्र भारत में एक ही कानून द्वारा वाणिज्य और उद्योग उसी के विवेक पर छोड़ दिया गया जिसका संबंध ऐसे मामलों यथा सांख्यिकी, पेटेंट, कापीराइट, बीमा, आयकर, विस्फोटक पदार्थों और खनन आदि के प्रशासन से था। प्रशासन के मामलों में स्थापित आधारों का अनुसरण करने के लिए प्रांतीय सरकारें केन्द्रीय सरकार के अधीन ही नहीं थीं अपितु वे नई नीति की पहल करने के लिए भी स्वतंत्र नहीं थीं। केवल भारत सरकार का ही यह कर्तव्य था कि वह नीति बनाएगी तथा नए आदेश जारी करके समग्र भारत में सुधार करेगी। इन आदेशों को प्रभावकारी बनाने के लिए इनके साथ प्रांतीय सरकारों को प्रचुर अनुदान दिए जाते थे और उन्हें स्पष्ट रूप से नई नीति के कुछ विशेष लक्षण को आगे बढ़ाने के प्रयोजन से इंगित किया जाता था। भारत सरकार को ऐसे नए परामर्श देने वाले अथवा निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की प्रायः नियुक्ति नहीं करती थी जिनको यह देखना होता था कि पद्धति में यकायक जो नई ऊर्जा प्रवाहित की गई है उसका चुने गए लक्ष्यों के लिए अच्छा रख-रखाव हो तो उन्हें ठीक ढंग से निदेशित किया जाए।

जब तक प्रांतीय सरकारें भारत सरकार के प्रति ऐसे गुणों से बाध्य बनी रहीं तब तक प्रांतों मेंं उत्तरदायी सरकार नहीं बन सकी। कोई भी सरकार एक बार और एक साथ दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकती।

प्रांतीय सरकारों को भारत सरकार के अधीन रखना ख्1, तथा विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी बनाना सैद्धांतिक रूप से असंगत था और व्यावहारिक दृष्टि से दूषित था।

  1. अधीनता की कोटि के बारे में यह ध्यान देना चाहिए कि वह प्रांतों की प्रतिष्ठा के अनुसार विविध रूप

की थी। देखिए संयुक्त रिपोर्ट, पृ. 37-45।