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परिवर्तन का स्वरूप

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होता है और संयुक्त को कम प्राप्त होता है...........अब ग्रामीण क्षेत्रों के कुल प्रशासन से भू-राजस्व का निर्धारण और वसूली से निकट से संबंधित है कि इन्हें प्रांतीय प्राप्ति बनाने के लाभ स्पष्ट हैं....इसके अलावा, व्यय तथा बड़े सिंचाई निर्माण कार्यों पर व्यय स्पष्ट कारणों से भू-राजस्व से संबंधित है और यदि उस शीर्ष की प्राप्तियां प्रांतीय बनाई जाती हैं तो तार्किक रूप से यह निष्कर्ष निकलता है कि प्रांतों को दुर्भिक्ष सहायता और रक्षात्मक निर्माण कार्यों को अधिक दायित्वों का भार वहन करना चाहिए....हमें बताया गया कि प्रांतों में लोकप्रिय सरकारों के उदय होने पर यह ठीक ही होगा कि प्रांतीय सरकार को भारत सरकार (मानो यदि शीर्ष अब भी विभाजित थे यह ऐसा करने में सक्षम थी) की सहायता पर निर्भर होना था जब इसकी भू-राजस्व नीति की आलोचना की गई। ख्1, परन्तु यह इसलिए है कि क्योंकि ऐसी संपत्ति को आंका जाए या उसका मूल्य भू-राजस्व बनाया जा सके।

  1. सरकार की भू-राजस्व नीति को लोकप्रिय नेताओं ने सदैव सही या गलत तरीके से संदेह की दृष्टि से देखा है और इस नीति के बारे में सदैव आलोचना का खतरा रहा है। भय की दृष्टि से इस नीति को लोकप्रिय प्रांतीय विधान-मंडल के अधीन निष्ठाहीन बना दिया है जिसके नियंत्रण में प्रांतीय विषय के रूप में था, इसने भारत सरकार अधिनियम की 1919 की धारा 12(1) के अधीन रिजर्वेश्न ऑफ बिल्स रूल्स द्वारा व्यवस्थित किया था कि किसी भी गवर्नर के प्रांत का गवर्नर जनरल के विचार के लिए किसी बिल को सुरक्षित रखेगा जिस पर इससे पूर्व गवर्नर जनरल की अनुमति नहीं मिली है और जो प्रांत की विधायी परिषद् द्वारा पारित किया गया है तथा गवर्नर को उसकी अनुमति के लिए प्रस्तुत किया जाता है यदि बिल गवर्नर के समक्ष लाया जाता है और इसमें आगे दिए गए ये उपबंध होते हैंःµ (ड.) किसी प्रांत के भू-राजस्व को प्रभावित करने के लिए हों अथवा

(i) ऐसी अवधि या अवधियां निर्धारित करे जिनमें कोई भी अस्थायी रूप से बसी हुई भू-सम्पत्ति

(जागीर) या भू-सम्पत्तियां बनाई जाएं अथवा बढ़ाई जाएं या

(ii) भू-राजस्व के निर्धारण को इतना सीमित कर दिया जाए कि विभाजित शीर्षों को केवल वित्तीय

कार्य साधक समझा जाए।

(iii) सामान्य सिद्धांतों को भौतिक दृष्टि से संशोधित किया जाए जिन पर अभी तक भू-राजस्व का

मूल्यांकन किया गया है यदि इस प्रकार का निर्धारण सीमांकन अथवा संशोधन प्रांत के लोक

राजस्वों को गंभीर रूप से प्रभावित करने के लिए गवर्नर के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं।