294 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
व्यय पर अलग से आबंटित हैं जिनमें दुर्भिक्ष सहायता और स्वरक्षित सिंचाई के व्यय शामिल हैं। वर्ष 1917-18 के बजट के आंकड़ों के आधार पर यह पाया गया कि इसे 87 प्रतिशत ख्1, कर निर्धारण की आवश्यकता होगी। ख्2, जो प्रांतीय लाभ पर होगी ताकि भारत सरकार के बजट में 1363 लाख रुपये के घाटे की पूर्ति की जा सके जो विभाजित शीर्षों की पद्धति के उन्मूलन द्वारा उत्पन्न होने की संभावना है। ख्2,
(रुपये लाख में)
प्रांत सकल सकल सकल अंशदान शुद्ध
प्रांतीय प्रांतीय प्रांतीय (स्तंभ 4 का प्रांतीय
राजस्व व्यय अतिरिक्त 87 प्रतिशत) लाभ
लाभ
मद्रास 13,31 8,40 4,91 4,28 63 बम्बई 10,01 9,00 1,01 88 13 बंगाल 754 6,75 79 69 10 संयुक्त प्रांत 11,22 7,47 3,75 3,27 48 पंजाब 8,64 6,14 2,50 2,18 32 बर्मा 7,69 6,08 1,61 1,40 21 बिहार और
उड़ीसा 4,04 3,59 45 39 6 सेंट्रल प्रोविंसेज 4,12 3,71 41 36 5 असम 1,71 1,50 21 18 3 योग 68,28 52,64 15,64 13,63 2,01
- कर निर्धारण की समान दर का प्रस्तावित आरोपण कुछ विचित्र है क्योंकि रिपोर्ट के लेखकों ने पैरा 206
में विरोध किया है कि ‘‘अंशदान की समानता अव्यावहारिक थी’’ आदि। संयुक्त रिपोर्ट का पैरा 206
भ्रांतिपूर्ण है। यह अंशदानों की समानता के विरुद्ध विरोध करता है जो वही है जैसा कि उस योजना
में स्वीकार किया गया है जिसकी सिफारिश की गई है।
- ऐसा तरीका जिससे प्रस्तावित योजना व्यावहारिक रूप से बनाई गई, आगे दिए गए आंकड़ों से एकत्र
किया जा सकता है जैसा कि रिपोर्ट कलकत्ता संस्करण (पृ. 134) में दिया गया है और वर्ष 1917-18
के बजट आंकड़ों पर आधारित हैःµ
टिप्पणीःµ पंजाब के आंकड़े स्तंभ 5 में कम कर दिए जाने चाहिए और प्रत्येक मामले में स्तंभ 6 के आंकड़ों में 3 ½ लाख की वृद्धि कर देनी चाहिए ताकि ऐसा लगातार प्रतिकर दिया जा सके जो 1914 में भारत सरकार के शेष में एक करोड़ के समनुदेश के लिए प्राप्त करने का प्रांत का अधिकार हो।