298 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
रूप में उसने सिफारिश की कि सामान्य स्टाम्पों का प्रांतीयकरण किया जाना चाहिए ताकि अदालती स्टाम्पों के साथ प्रांतीय लाभ के बढ़ाने के साधन बन सकें। अखिल भारतीय सूची से प्रांतीय सूची में इन सामान्य स्टाम्पों के स्थानांतरण का प्रभाव प्रांतीय संसाधनों में वृद्धि करना था और केन्द्रीय सरकार के संसाधनों को कम करना था। समिति ने स्वीकार किया कि वर्ष 1991-92 में दस करोड़ रुपये का घाटा रहा जिसमें भारत सरकार ख्1, द्वारा अनुमानित 6 करोड़ का पिछला घाटा सम्मिलित है। इसके अलावा सामान्य स्टाम्पों से 4 करोड़ की हानि रही जिसमें समिति ने प्रांतों को राजस्व दिया। यह राशि कुछ समाधानों ख्2, के अधीन रही। इन समाधानों के फलस्वरूप 983.06 लाख रुपये का स्पष्ट घाटा हुआ। इस विचार का कड़ाई से पालन करने में समिति ने आगे दिए गए अनुपात निर्धारित करने की पद्धति अपनाई जिसके लिए समिति का आदर करना अनिवार्य समझा गया और इस दिशा में 9 प्रांतों को वर्ष 1921-22 में 983 लाख रुपये की राशि को पूरा करने के लिए अंशदान दिएःµ
प्रारंभिक अंशदान (लाख रुपये में)
प्रांत राजस्व के वितरण समिति द्वारा निर्धारित अंशदानों के भुगतान
के अधीन व्यय करने सिफारिश किए गए के बाद शेष को
की शक्ति का अंशदान व्यय करने की
बढ़ाया जाना शक्ति को बढ़ाया मद्रास 5,76 3,48 2.28 बम्बई 93 56 37 बंगाल 1,04 63 41 संयुक्त प्रांत 3,97 2,40 1,57 पंजाब 2,89 1,75 1,14 बिहार और
उड़ीसा 51 शून्य 51 बर्मा 2,46 64 1,82 सेंट्रल प्रोविंसेज 52 22 30 असम 42 15 27 योग 18.50 9.83 8,67
- केन्द्रीय तथा प्रांतीय राजस्व के सीमांकन के बारे में भारत सरकार की सिफारिशें, 1919 का कमांड
334 विवरण 3
- ये समायोजन बर्मा में मिलिटरी फोर्स, पेंशन और वेतन भत्तों के बारे में थे। सी.एफ. फाइनेंशियल रिलेशंस
कमेटी की रिपोर्ट, पैरा 10