11 परिवर्तन का स्वरूप - Page 315

300 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अन्य शब्दों में यह कहा जा सकता है कि केन्द्रीय सरकार के लाभ के लिए सीमा में करों का दबाव रहा। दूसरे के बारे में समिति ने यह निर्णय किया किःµ

‘‘प्रांतों को अंशदान देने की क्षमता उसकी कर निर्धारण की क्षमता होती है जो

उसके कर दाताओं की आय के जोड़ पर निर्भर करती है अथवा उसके कर

दाताओं की औसत आय उनकी संख्या से गुणा की जाती है।’’

समिति इस तथ्य की स्वीकृति में निष्कपट थी कि जो आंकड़े उपलब्ध थे वे प्रत्यक्ष मात्रा लाभ मूल्यांकन के लिए पर्याप्त न थे या उस कुल निवल अंशदान का मूल्यांकन होता है जो प्रांत ने भारत सरकार को किए अथवा अंशदान के लिए उसकी क्षमता रही तथा निर्णय किया किःµ

‘‘जब तक किसी ऐसे सूत्र के बताने का यत्न न किया जाए जो अशंदानों के

मानक अनुपात का आधार हो और जिसमें निश्चित आंकड़ों के द्वारा वर्ष प्रतिवर्ष

स्वतः प्रयोग की क्षमता है।’’

फिर भी समिति ने उस आदर्श आधार को नहीं छोड़ा जब उसने मानक अंशदान निर्धारित करने का चयन किया था। उसने यह कहाःµ

‘‘ऐसे आंकड़े उपलब्ध हैं उनके सर्वेक्षण के बाद और प्रांत की परिस्थितियों

की गहन जांच के बाद हम उन अंशदानों के नियत अनुपात की सिफारिश के

योग्य हो जाते हैं जो हमारे मत में किसी भी घाटे के भार के मानक और सम

वितरण का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस अनुपात के मानने में हमने भारत सरकार

के कोष में प्रांतों के अप्रत्यक्ष अंशदानों पर विचार किया है और विशेष रूप से

सीमा-शुल्क तथा आयकर के दायित्व को समझा है। हमने प्रांतों की तुलनात्मक

कर निर्धारण योग्य क्षमताओं की जांच की है। यहां जांच उनकी कृषि और

औद्योगिक संपत्ति तथा उनकी आर्थिक अवस्थाओं के अन्य संबंधित पक्षों को

लेकर की है जिसमें विशेष रूप से दुर्भिक्ष के लिए उनका दायित्व दिया जाना

चाहिए कि हमने उनकी कर योग्य क्षमताओं पर विचार किया है जो वर्तमान

समय में हैं अथवा जो निकट भविष्य में होंगी, अपितु कृषि और उद्योग की

दृष्टि से प्रसार और विकास के लिए प्रत्येक प्रांत की क्षमता पर भी विचार

किया है और खनिजों तथा वनों जैसे अपूर्ण विकसित सम्पत्तियों के बारे में भी

विचार किया है। हमने राजस्व के वर्तमान शीर्षों के लचीलेपन पर भी विचार

किया है जो प्रत्येक प्रांत के लिए और कर निर्धारण के लिए उसकी सम्पत्ति

की उपलब्धता हेतु सुरक्षित किए जाएंगे।’’

अपनी पूर्ण क्षमता के अनुसार अनुमान लगाने के बाद प्रत्येक परिस्थिति पर जो बल दिया गया उसके अनुसार समिति ने आगे दिए गए अनुपात की सिफारिश की