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परिवर्तन का स्वरूप

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जैसा कि भारत सरकार के बजट में घाटे को पूरा करने के लिए प्रांतों के तुलनात्मक अंशदान के लिए समान आधार का प्रतिनिधित्व करते हैंःµ

स्थाई अंशदान

मद्रास घाटे में अंशदान का प्रतिशत

मद्रास 17

बंबई 13

बंगाल 19

संयुक्त प्रांत 18

पंजाब 9

बर्मा 6 ½

बिहार और उड़ीसा 10

सेंट्रल प्रोविंसेज 5

असम 2 ½

योग 100

समिति इस बात पर सहमत हुई कि पर्याप्त समयावधि होनी चाहिए ताकि प्रांतों को इस मानक अनुपात ख्1, के अनुसार समान अंशदान देने के लिए कहा जाए तो इससे पहले नई परिस्थितियों के अनुरूप वे अपने बजट का समायोजन कर सकें परन्तु समिति ने यह विचार किया कि समायोजन के लिए जो समयावधि दी गई है उसको अनुचित रूप से नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

प्रारंभिक अनुपात के बारे में समिति ने कहा ‘‘कि हमने जो अनुपात प्रस्तावित किया है वह व्यावहारिक रूप से आवश्यक है परन्तु उन प्रांतों को अधिक अवधि के लिए उस भार के वहन करने की आवश्यकता नहीं है अथवा प्रांतीय बजटों के विस्थापन को रोकने की आवश्यकता से अधिक विस्तार देने की नहीं है जिन्हें इसके अंतर्गत भुगतान करने के लिए कहा जाएगा और जिन्हें क्षमता से अधिक भुगतान करना चाहिए।’’ इसलिए समिति ने प्रस्ताव कियाःµ

‘‘किसी भी ऐसे घाटे के लिए मानक अनुपात के अनुसार अंशदान किए जाने चाहिए

जिससे कि अंशदान के सातवें वर्ष और मानक अनुपात के प्रारंभ से संक्रमण

  1. मानक अनुपात की दिशा में वित्तीय संबंध समिति द्वारा अपनाए गए आधार की आलोचना देखिए पैरा

12, रायबहादुर के.वी. रेड्डी का सुधार आयुक्त, शिमला को लिखा गया पत्र, 1920 का कमांड 974,

पृष्ठ 58, सी.एम.डी., पृ. 974, 920