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302 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

की प्रक्रिया तक अंशदान के दूसरे वर्ष में लगातार भुगतान किए जाएं और इन्हें

प्रतिवर्ष 6 समान भागों में भुगतान किया जाना चाहिए।’’

समिति की सिफारिशों के अनुसार 7 वर्ष के लिए अंशदानों के प्रारंभिक, माध्यमिक और अंतिम अनुपात आगे की तालिका में दिखाए गए हैंःµ

अंशदान के प्रथम वर्ष से प्रारंभ होकर लगातार सात वर्ष के घाटे में अंशदान का प्रतिशत।

(सम अर्ध भाग तक)

प्रांत पहला दूसरा तीसरा चौथा पांचवां छठा सातवां

वर्ष वर्ष वर्ष वर्ष वर्ष वर्ष वर्ष मद्रास 35 ½ 32 ½ 29 ½ 25 ½ 23 20 17 बम्बई 5 ½ 7 8 9 ½ 10 ½ 12 13 बंगाल 6 ½ 8 ½ 10 ½ 12 ½ 15 17 19 संयुक्त प्रांत 24 ½ 23 ½ 22 ½ 21 20 19 18 पंजाब 18 16 ½ 15 13 ½ 12 10 ½ 9 बर्मा 6 ½ 6 ½ 6 ½ 6 ½ 6 ½ 6 ½ 6 ½ बिहार और

उड़ीसा शून्य 1 ½ 3 5 7 8 ½ 10 सेंट्रल प्रोविंसेज 2 2 ½ 3 3 ½ 4 4 ½ 5 असम 1 ½ 1 ½ 2 2 2 2 2 ½ योग 100 % 100 % 100 % 100 % 100 % 100 % 100 %

इन सिफारिशों को भारत सरकार और भारत सचिव (सेक्रेटरी ऑफ स्टेट) द्वारा स्वीकार किया गया। परन्तु जब नियम जिनमें वे निहित थे, उस संसदीय संयुक्त चयन समिति के समक्ष लाए गए, जो भारत सरकार अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों के मसौदे के संशोधन के लिए नियुक्त की गई थी तो समिति ने प्रांतों से राजस्व और अंशदान के आबंटन में कुछ महत्त्वपूर्ण परिवर्तन किए। संयुक्त समिति ने अपनी रिपोर्ट ख्1, में मान्यता प्रदान की जो इस प्रकार हैःµ

‘‘उस समस्या की जटिलता, जिससे वित्तीय संबंध समिति को निपटना था और किसी

असंभव समाधान के लिए जो लगभग सभी स्थानीय सरकार को मान्य हो वह बहुत

कठिन था। यह विश्वास करती है कि इस प्रस्ताव का असंतोष जैसा कि प्रस्तावों

  1. भारत सरकार के अधिनियम पृ. 172 के अंतर्गत बनाए गए प्रारूप नियमों में संशोधन करने हेतु गठित

संयुक्त समिति की दूसरी रिपोर्ट, 1920, पृ. 2-3