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परिवर्तन का स्वरूप

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ने पैदा किया है केन्द्रीय और प्रांतीय सरकारों के बीच संसाधनों के वितरण के लिए अनिवार्य है और उन असमानताओं को दूर करना असंभव है जो दीर्घावधि के परिणाम हैं तथा ऐतिहासिक अवहेलना के कारण हैं।’’ समिति ने यह इच्छा व्यक्त की कि ‘‘फिर भी नीति के आधार पर उन अवरोधों द्वारा पैदा की गई निराशा को दूर करना है जिनसे प्रांतों के लिए अंशदान की पद्धति भी बनाई गई है। इस भार को कम करने के लिए साधनों के बारे में समिति ने सुझाव दियाःµ

  1. ‘‘कि आय पर कर निर्धारण से राजस्व की वृद्धि का कुछ भाग सभी प्रांतों

को दिया जाना चाहिए जहां तक यह वृद्धि निर्धारित आय की राशि में वृद्धि

के कारण हो।’’

  1. ‘‘कि किसी प्रांत द्वारा देय प्रारंभिक अंशदान में वृद्धि बिल्कुल नहीं की जानी

चाहिए परन्तु कुल अंशदान में शनैः शनैः कमी करना वित्त संबंध समिति द्व

ारा सिफारिश किए गए सैद्धांतिक मामलों को प्राप्त करने का प्रमुख साधन

होना चाहिए।’’ तदनुसार हस्तांतरण नियमों में यह व्यवस्था की गई है किः

(15) भारतीय आयकर अधिनियम, 1918 के अधीन जमा किए गए आयकर

का एक भाग प्रत्येक स्थानीय सरकार को आबंटित किया जाएगा। उक्त अधि

नियम के अंतर्गत निर्धारण में 3 पाई प्रति रुपये आबंटित की जाएगी जिसका

संबंध एकत्र किए जाने वाले निर्धारित आयकर से है। इस प्रकार विनिर्दिष्ट

पाइयों की संख्या की इस प्रकार गणना की जाएगी ताकि स्थानीय सरकारों

को प्रारंभ में ही ऐसी राशि मिल सके जो लगभग 400 लाख की राशि

होगी। ख्1,

  1. हस्तांतरण नियम 15 से संबद्ध आगे दिए गए उपबंध के अधीन यह व्यवस्था की गई थीःµ (2) इस आबंटन के फलस्वरूप प्रत्येक स्थानीय सरकार गवर्नर जनरल इन काउंसिल को एक ऐसी

राशि का नियत वार्षिक समनुदेशन करेगी जो वर्ष 1920-21 में स्थानीय सरकार को प्रोद्भूत हुई

थी (उस वर्ष में विशेष आयकर और यदि स्थापनाओं की लागत के प्रांतीय भाग को कम करने

के बाद यदि उस वर्ष में उप-नियम (1) के अंतर्गत पाई गई दर निर्धारित की गई और कर की

वसूली में असामान्य रूप से देर हो जाए तो समुचित छूट की व्यवस्था की जाएगी। (3) किसी प्रांत में रखी गई विशेष आयकर की स्थापनाओं की लागत स्थानीय सरकार और गवर्नर

जनरल इन काउंसिल द्वारा क्रमशः 25 प्रतिशत और 75 प्रतिशत के अनुपात में वहन की जाएगी। (4) यदि किसी वित्तीय वर्ष में निर्धारित समनुदेशन के संबंध में उप-नियम (2) और (3) के अधीन

स्थानीय सरकार द्वारा देय कुल राशि और विशेष आयकर स्थापनाओं की लागत उप-नियम (1)

के अधीन आबंटित आयकर के भाग की राशि से अधिक हो तो उस वर्ष के लिए नियत समुदेशन

ऐसी अधिक राशि द्वारा किया माना जाएगा।