परिवर्तन की समालोचना 313
बीच विभाजित की गई थी। कनाडा में यह सर्वविदित है कि प्रांतीय राजस्व का अधिकांश भाग उन करों की आय से प्राप्त होता है जो संघीय सरकार द्वारा लगाए जाते हैं। भारत में राजस्व के विभाजित शीर्षों की पद्धति के विरुद्ध पक्षपात अंशतः
खेदजनक है क्योंकि यह इस विचार पर आधारित है कि यह राजस्व के विभाजन के सिद्धांत के विरुद्ध है। जिन लोगों ने इसका विरोध किया ख्1, उन्होंने कहा कि इसमें व्यय के विभाजित शीर्ष निहित हैं जिसमें प्रांतों की व्यय करने की शक्तियों में बाधा डाली गई और भारत सरकार को प्रत्यक्ष रूप से अपने बजट अनुमान में हस्तक्षेप करने योग्य बना दिया तथा भारत सरकार ने अपनी प्रत्येक पाई पर निगाह रखी। विभाजित शीर्षों की पद्धति को निस्संदेह इन आपत्तिजनक लक्षणों द्वारा स्पष्ट किया गया है, परन्तु व्यय का विभाजन राजस्व के विभाजन का आवश्यक सहवर्ती न ही है और नहीं यह उसका आवश्यक प्रसंग है कि ऐसा राज्य क्षेत्र को किसी भी आय के अनुमानों की गणना में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए जिसने कर की आय में भाग लिया परन्तु उसका प्रशासन नहीं किया। यदि इसके बुरे लक्षणों को अलग कर दिया जाए तो राजस्व के विभाजित शीर्षों की पद्धति साधारणतया एक दूसरा नाम है जिसको प्रोफेसर सेलिगमैन ने आय की पृथक्करण पद्धति और आय का विभाजन बताया है। ख्1, इस पद्धति के स्तर में किसी एक कर क्षेत्र द्वारा राजस्व के विशेष स्रोत के विशिष्ट मूल्यांकन सम्मिलित है फिर भी इसमें अन्य कर क्षेत्र की आय के एक भाग का समविभाजन होता है। राजस्व के विभाजित शीर्षों की पद्धति स्रोतों के पृथक्करण की पद्धति समाप्त नहीं की जाती जिसका केवल कारण यह है आय का विभाजन होता है। विभाजित शीर्षों की ऐसी पद्धति में पृथक्कता होती है क्योंकि कर का निर्धारण अलग-अलग किया जाता है जो पृथक्कता का सार होता है और यह विशेषकर एक कर क्षेत्र में होता है और आय का विभाजन इस प्रकार विनियमित किया जा सकता है कि वास्तविक प्रथकता से असंगतता की आवश्यकता नहीं है।
अंशदानों की पद्धति वही करती है जो विभाजित शीर्ष पद्धति का लक्ष्य होता है। विभाजित शीर्षों की पद्धति के समान यह उपयुक्तता तथा पर्याप्तता की परीक्षाओं के उत्तर देती है और इसके लिए प्रशासित किए जाने वाले कर उस क्षेत्र द्वारा दिए जाते हैं जो ऐसा करने के लिए सबसे सहज होते हैं और कराधान क्षेत्र द्वारा कोई राशि गैर-कराधान क्षेत्र को देकर पर्याप्तता की भी परीक्षा दी जाती है। आवश्यक रूप से विभाजित शीर्षों की पद्धति और अंशदानों की पद्धति एक समान होती है। इन दोनों में केवल यह अंतर होता है कि जहां तक आय
- आर.सी.डी., मिट ऑफ एवीडेंस, खंड 6, क्यू 25017-25020, खंड 7, क्यू. 35531, 35225-29
- सामने उद्धरण अध्याय II, राज्य और स्थानीय राजस्व की पृथकता, विशेषकर पृष्ठ 365-66