ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रशासन और वित्त प्रबंध - Page 33

18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(1) ‘‘सरकार द्वारा बंगाल में अफीम की खेती और उसकी बिक्री की विशिष्ट

पद्धति द्वारा’’

(2) ‘‘मालवा के राज्यों में की जाने वाली अफीम की खेती और बंबई से

जहाजों द्वारा भेजी जाने वाली अफीम पर बंबई में लगाए गए अत्यधिक

निर्यात शुल्क द्वारा’’

1799 के अधिनियम छः की धारा 3 द्वारा बंगाल में और 1803 के अधिनियम 41 की धारा 2 के द्वारा उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में पोस्त की खेती पर प्रतिबंध लगा था।

‘‘सरकार द्वारा रैयतों के साथ कुछ चुने हुए जिलों में भूमि के कुछ भाग में सफेद पोस्त बोने के वार्षिक अनुबंध किए गए। आर्थिक पेशगी की पद्धति के अंतर्गत पोस्त के उत्पाद को अफीम के रूप में सरकार को एक निश्चित दर पर बेचा जाता था। बंगाल के अफीम की एकाधिकार खेती से 1856 में कुल 2,767,136 रुपये की आय हुई।’’

अफीम के पारगमन से प्राप्त होने वाले राजस्व का एक अपना खूबसूरत छोटा सा इतिहास है। 1831 से पहले ब्रिटिश अफीम पर पूर्ण एकाधिकार बनाए रखने के लिए देशी रियासतों से रेजीडेंट के माध्यम से अफीम खरीदा करते थे और इसे बंबई और कलकत्ता में भेजते थे। लेकिन पुर्तगाल उपनिवेश में इसकी अधिक तस्करी को रोकने के लिए एकाधिकार नीति त्याग दी गई और इसके बदले दरों के मार्ग पर विशेष दर से परिवहन कर लगा कर बंबई तक की परिवहन लागत को पूरा किया गया। परिवहन कर सर्वप्रथम 140 पौंड वजन की प्रत्येक पेटी पर 175 रु. निश्चित किया गया। इस प्रक्रिया से आय में कमी थमी।

सिंध पर विजय से पुर्तगाली क्षेत्र में अफीम की तस्करी के अतिरिक्त मार्ग भी बंद हो गए। फलस्वरूप यह ठीक ही आशा की गई कि ऊंचे परिवहन कर से अधिक लाभ मिलेगा क्योंकि व्यापार की दिशा बदलना असंभव था। इसलिए अक्तूबर 1843 में यह दर बढ़ाकर 200 रु. प्रति पेटी की गई तथा 1845 में 300 रु. प्रति पेटी और 1847 में 400 रु. प्रति पेटी कर दी गई।

IV. नमक कर

भारत में नमक विभिन्न प्रकार से तैयार किया जाता है और देश के विभिन्न भागों में इस पर अलग-अलग प्रकार से कर लगाया जाता है।

यह या तो समुद्र के जल को उबालकर तैयार किया जाता है जैसे बंगाल में या