316 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के बीच उसके प्रयोग में समता लाई जाए। हम जानते हैं कि अंशदान इस प्रकार विनियमित किए जाते हैं कि धनी और गरीब प्रांतों में व्यय करने की शक्ति को सुरक्षित रख दिया जाता है ताकि वे अपनी उन अधिक आवश्यकताओं को पूरा कर सकें जो मानक व्यय के लिए किसी आंकड़े द्वारा पूरी नहीं की गई हैं।
आसान अंशदानों के पक्ष में समान अंशदानों के रद्द करने का मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि अंशदानों के भार ने किसी भी प्रांत को इस बात से वंचित नहीं किया कि वह अतिरिक्त व्यय को पूरा करे जैसा कि वह नितांत आवश्यक समझे। वास्तव में अंशदानों की कोई भी पद्धति भारतीय पद्धति की तुलना में अधिक साम्यता बनाने में गणना ही की जा सकती।
अभी तक हमने इस बात की जांच की है कि क्या नवीन वित्तीय प्रबंध प्रशासकीय देय से व्यावहारिक और समान है। हमें अब यह देखना है कि क्या प्रबंध वित्तीय रूप से पर्याप्त सिद्ध हुए हैं? यह बात याद रखी जाएगी कि वित्तीय संबंध समिति ने यह निर्णय किया कि देश के आम स्रोत प्रचुर मात्रा में थे, उसके लिए बुद्धिमत्तापूर्ण योजना की आवश्यकता थी ताकि प्रत्येक प्रांत के पास ‘‘व्यय करने की शक्ति’’ अथवा अतिरिक्त राशि पर्याप्त मात्रा में बनी रहे।
(हजारों-रुपये में)
प्रांत मानक अंक संशोधित बजट
1921-22 1922-23
मद्रास राजस्व व्यय बेशी 14,98,02 15,58,59 16,76,50
और घाटा 14,07,20 17,15,93 17,18,55
90,02 1,57,34 42,05 बम्बई राजस्व व्यय 12,09,70 13,67,13 14,93,06
बेशी और घाटा 11,55,03 16,52,80 15,42,17
54,67 2,85,67 50,11 बंगाल राजस्व व्यय 8,55,28 8,86,53 10,55,86
बेशी और घाटा 8,61,13 11,10,60 10,36,90
5,85 2,24,07 18,96 संयुक्त प्रांत राजस्व व्यय 12,29,88 13,34,31 13,58,67
बेशी और घाटा 12,06,56 14,59,87 13,85,65
1,23,32 1,25,56 26,98