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परिवर्तन की समालोचना

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प्रांत मानक अंक संशोधित बजट

1921-22 1922-23

पंजाब राजस्व व्यय 9,73,51 10,73,76 11,38,26

बेशी और घाटा 9,10,69 12,23,24 12,68,44

62,82 1,49,48 1,30,18

बर्मा राजस्व व्यय 8,24,28 9,99,33 10,00,57

बेशी और घाटा 7,84,78 10,27,51 11,90,70

39,50 28,18 1,90,13

बिहार और राजस्व व्यय 4,30,39 4,46,15 4,62,65 उड़ीसा बेशी और घाटा 4,20,70 4,85,97 5,13,80

90,69 39,82 51,15 मध्य भारत राजस्व व्यय 4,35,37 5,14,80 5,35,23 (सेंट्रल बेशी और घाटा 4,38,80 5,41,76 5,72,17 प्रोविंसेज) 3,43 29,96 36,94 असम राजस्व व्यय 1,81,46 2,01,12 2,08,06

बेशी और घाटा 1,78,25 2,19,45 2,22,58

3,21 18,33 14,52

समिति द्वारा जिस योजना की सिफारिश की गई थी, उसकी गणना को ऐसे अलबत्ता स्वीकार किया जाना था। परन्तु जब हम सुधारों के प्रारंभ किए जाने के समय से अलग-अलग प्रांतों के बजटों का विश्लेषण करते हैं तो यह नितांत निराशाजनक लगता है।

इस प्रकार वर्ष 1922-23 के लिए नौ प्रांतों के अनुमानित राजस्व और लाभ पर विचार करते समय यह वि्ति हुआ कि केवल दो प्रांतों अथार्त् बर्मा और बंगाल के चालू राजस्व के बीच केवल संतुलन पाया गया और बाद में यह परिणाम भी प्राप्त नहीं हो सका परन्तु केन्द्रीय सरकार को अपने वार्षिक अंशदान के अस्थायी छूट ख्1, में निहित था तथा कराधान का कार्यक्रम बनाया गया ताकि 140 लाख रुपये एकत्र किए जा सकें। शेष प्रांतों में वर्ष के घाटे बढ़कर कुल 7,74 लाख रुपये हो गए। यह भारी घाटा नए-नए कराधान ख्2, से 3,52 लाख रुपये तक वित्तपोषित हुआ। और शेष घाटा बची हुई राशि से और जनता तथा केन्द्रीय सरकार से ऋण लेने से पूरा किया

  1. विधान सभा बहस, खंड 3 संख्या 8

  2. देखिएµभारत सरकार, वित्त विभाग का सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया को तारीख 13 जुलाई, 1922

का पत्र संख्या 13