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परिवर्तन की समालोचना

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कि वित्तीय प्रयोजनों के लिए राष्ट्रीय संसाधनों को संगठित करने और इन्हें व्यवस्थित करने में असफल हुए हैं। कुछ सीमा तक यही बात भारत सरकार के लिए सही है।

देश के राष्ट्रीय संसाधनों का सर्वेक्षण करते समय यह बात स्पष्ट हो गई है कि ऐसे दो स्रोत हैं जिन्हें सरकार उचित रूप से व्यवस्थित करने योग्य नहीं बनी है। इनमें से एक भू-राजस्व है। यह विख्यात है कि भू-राजस्व भारत सरकार का सबसे बड़ा संसाधन है। भू-राजस्व की उगाही के लिए प्रत्येक किसान को अंशदान देना होता है परन्तु उनमें से प्रत्येक के लिए निर्धारण की दर समय-समय पर बढ़ाई नहीं जाती। दूसरी ओर बंगाल और भारत के अन्य भागों में निर्धारण की दर स्थायी तौर पर तय की जाती है। इसके फलस्वरूप भारत के ऐसे भागों में, जो लम्बी अवधि की स्थिर सरकार तथा परिणामस्वरूप पूंजी की वृद्धि का लाभ उठाते हैं, उन भागों की अपेक्षा समृद्धि में अधिक उन्नति प्राप्त की है। भू-राजस्व में व्यावहारिक रूप से कोई वृद्धि नहीं होती लेकिन भू-स्वामी अपनी अधिक बढ़ी हुई आय के साथ राज्य के वित्तीय भार की वृद्धि में कुछ भी योगदान नहीं करते। लार्ड केनिंग के समय से स्थाई बंदोबस्त का लोगों की वित्तीय दशा सुधारने के लिए रामबाण के रूप में सुझाव दिया है। 1860 के घोर दुर्भिक्ष के बाद भारत के तत्कालीन वायसराय और गवर्नर जनरल ने भारत के सभी भागों में स्थाई बंदोबस्त के विस्तार की सिफारिश की। सर जान (बाद में लार्ड) लारेंस ने इस सिफारिश का समर्थन किया तथा सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया, सर चार्ल्सवुड और सर स्टेफर्ड नार्थकोट ने इस प्रस्ताव का अनुमोदन किया। सौभाग्यवश देश के लिए स्थाई बंदोबस्त को व्यापक बनाने का प्रस्ताव 1883 में रद्द कर दिया गया। निस्संदेह कुछ लोगों ने इस निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण माना और इसके बाद अधिक समय तक स्थाई बंदोबस्त के पक्ष में अपना आंदोलन जारी रखा परन्तु वास्तविक शक्ति यदि इस आंदोलन में थी, किसी विदेशी और अनुत्तरदायी नौकरशाही के वित्तीय संस्थानों को सीमित करने के इरादे से ली गई थी। उस समय स्थाई बंदोबस्त के पक्ष में जिन लोगों ने आंदोलन किया था उन्होंने यह महसूस नहीं किया कि यह अनुत्तरदायी नौकरशाही किसी दिन लोगों के उत्तरदायी शासन को स्थाई बंदोबस्त में बदल देगी क्योंकि नौकरशाही के अप्राधिकृत लाइसेंस को समाप्त करने के लिए उत्तरदायी शासन स्थापित करने की इच्छा की गई थी। इससे व्यवस्थित प्रगति के मार्ग में प्रवेश करने के लिए लोकप्रिय सरकार की स्वतंत्रता को बंधन में डाल दिया गया। एक घटिया सरकार अपनी वित्तीय शक्तियों का दुरुपयोग कर सकती है परन्तु ऐसी सरकार अच्छी सरकार नहीं हो सकती यदि उसकी वित्तीय शक्तियों पर गंभीर सीमा हो इसलिए यह अच्छी बात थी कि स्थाई बंदोबस्त के अवगुण को भारत