320 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
भर में फैलने की अनुमति नहीं दी गई। परन्तु यह अधिक अच्छा होगा यदि नवीन वित्तीय प्रबंधों की आवर्ती बंदोबस्त पद्धति से भू-राजस्व के स्थाई बंदोबस्त पद्धति को बदलने के लिए उपाय निकाला जाता। यह देश के सामान्य संसाधनों के बढ़ाने का एक महत्त्वपूर्ण उपाय था और इसके द्वारा सभी संबंधित सरकारों को उपयुक्तता प्रदान की। इसके बजाए वित्तीय प्रबंध पर इस प्रकार विचार किए गए कि वे ऐसे प्रांतीय दबाव स्थाई रूप से व्यवस्थित प्रांतों के अधीन नहीं थे जो स्थाई बंदोबस्त पर पुनर्विचार करने के लिए उन पर दबाव के व्यावहारिक परिणाम को प्राप्त करते।’’ ख्1,
यदि ऐसा किया गया होता तो सभी के लाभ के लिए सामान्य संसाधनों को बढ़ाया जाता। जैसी कि स्थिति थी, स्थाई बंदोबस्त के बचाए रखने के पक्ष में न केवल व्यवस्था की गई परन्तु बंगाल जिसमें स्थाई रूप से बसे हुए भू-स्वामियों की संख्या सबसे अधिक थी, भारत सरकार को अंशदान देने के लिए मुक्त कर दी गई थी क्योंकि भारत सरकार पर अन्य उपायों से अपना घाटा पूरा करने के लिए दबाव डाला गया था।
इसलिए भू-राजस्व एक ऐसा स्रोत था जिसे नवीन वित्तीय प्रबंधों के लिए पर्याप्तता प्रदान करने के हित में सुव्यवस्थित किया जा सकता था। एक अन्य स्रोत सीमा-शुल्क का राजस्व है जिसे सरकार उपयोग करने से इंकार करती है। वित्तीय नीति जो गदर से पूर्व के दिनों में अपनाई गई थी आत्मघाती प्रकार की थी। जैसा कि हम जानते हैं कि यह नीति इसी प्रकार की थी। यही बात गदर के बाद वित्तीय नीति के लिए सही है। गदर से लेकर इस समय तक भारत सरकार ने राज्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सीमा शुल्क से प्राप्त राजस्व को स्रोत के रूप में उपयोग नहीं किया और जब भारत सरकार ने इसका उपयोग किया तो अधिक अनिच्छा से उपयोग किया और कभी भी इसका भरपूर उपयोग नहीं किया, उन परिस्थितियों का वर्णन नहीं किया जाना है जब भारत सरकार ने खजाने की अत्यधिक मांग होने पर भी इस स्रोत से अपने राजस्व को वस्तुतः कम कर लिया। ख्2, इस प्रकार की वित्तीय नीति के पक्ष में दिया गया प्रत्यक्ष कारण यह है कि सीमा-शुल्क से प्राप्त राजस्व सैद्धांतिक रूप से गलत है, प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि भारत में सीमा-शुल्क से राजस्व एकत्र नहीं किया जाता क्योंकि यह आशंका है कि इसके अंतर्गत भारतीय उद्योग अंग्रेजी उद्योगों के विरुद्ध सुरक्षित किए जाएंगे। यह बात निर्विवाद है कि भारत की पूर्ण नीति इंग्लैंड के निर्माताओं के हितों द्वारा अधिदेशित है और इसके कारण को जानना सरल है। भारत के लिए सर्वोच्च कार्यकारी भारत सचिव (सेक्रेटरी ऑफ
संयुक्त रिपोर्ट, पृ. 171
वित्त वक्तव्य 1880-81 के लिए पैरा 74