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328 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जो आरक्षित विषयों के थे, यह आशा होती कि वह नए कराधान के प्रस्ताव पर सहमत कराने के लिए विधान-मंडल को राजी कर लेगा, ‘‘आरक्षित’’ विषयों अर्थात् परिषद् पर मंत्रालय का प्रभाव आवश्यक रूप से मितव्ययिता और कटौती की दिशा में होगा। ‘‘नरमपंथी’’ इस उपबंध की व्याख्या करने में पूर्णतया सही थे और देश को नए कराधान से बोझिल करने के अपने आग्रह में ठीक थे। ख्1, परन्तु घोर विवादास्पद मामले में और सुधारों की वास्तविकता से जनता को विश्वसनीय बनाने की उनकी इच्छा से उन्होंने कुछ मनोरंजक चित्र बनाए कि इस उपबंध के तत्वावधान में कार्य करने वाले मंत्रीगण किस प्रकार परिषद् को मुकाबले पर रखेंगे। उसने नौकरशाही को सचेत कर दिया। नौकरशाही ने यह शोर मचाया कि ‘‘आरक्षित’’ विषयों के लिए इस उपबंध का छोड़ना खतरनाक था कि उन मंत्रियों की दया पर अर्पित करना था जिन्होंने उन विषयों की पर्याप्त बजट व्यवस्था को इंकार करने के परिणामों के लिए कोई भी उत्तरदायित्व वहन नहीं किया था। संयुक्त रिपोर्ट ख्2, के लेखकों ने इस दलील के बल को महसूस किया और यह स्वीकार किया कि प्रबंधों की सफलता संगत तरीकों से कार्य करने वाले उपयुक्त व्यक्तियों के कार्य पर निर्भर करती थी। शायद वे इस अनुमान से इंकार करने में सही थे कि मंत्रीगण या तो अपने दावों के कम करने या कराधान आरोपित करने में सहयोग नहीं देंगे ताकि उस व्यय को पूरा किया जाए जिसे परिषद् ‘‘आरक्षित’’ विषयों के समुचित प्रशासन के लिए आवश्यक समझती थी। परन्तु समर्थकों के अप्रिय उल्लास से भयभीत नौकरशाही ने इस बात पर जोर दिया कि विवेकी व्यक्ति कभी-कभी पूर्ण विश्वास के साथ उन अन्य विवेकी व्यक्तियों से अधिक मतभेद रखेंगे जब कार्य उपलब्ध कराने का प्रश्न आएगा जिसे एक पार्टी सशक्त और विकसित बनाने के लिए उत्तरदायी थी जबकि दूसरी पार्टी अपने धन का शेयर पाने के लिए चिंतित थी। उसके मत में उन परिस्थितियों का भली-भांति अनुमान किया जा सकता है जिनमें औचित्य प्रभावोत्पादक नहीं था। यह तर्क दिया गया कि हमें यह अनुमान करना चाहिए कि गवर्नर इन काउंसिल ने किसी आरक्षित विषय पर आवश्यक नया और भारी व्यय प्राप्त किया है परन्तु वह मंत्रियों को प्रेरित नहीं कर सकता कि वे अपने विषयों अथवा उसके लिए कराधान आरोपित करने के लिए स्वीकृति की अनुमति दे सकें। इसके बाद गवर्नर अपनी विशेष शक्तियों के अधीन उस व्यय के लिए आग्रह करता है जिसे आगामी बजट में व्यवस्थित किया जाना होता है। और इसका परिणाम यह है कि मंत्रियों के पास अपने अंतरित विषयों की अपर्याप्त निधि रह जाती है। क्या होना है? क्या मंत्रियों पर इस बात का

  1. वाइनबर्ज, सेपरेशन ऑफ स्टेट एंड लोकल रेवेन्यूज इन कैनेडा, पृ. 13 एक उदाहरण के लिए जहां सैन्य

शक्ति कैनेडा में उसके व्यय का स्वेच्छा से भुगतान करने के लिए स्थापित की गई। 2. संयुक्त रिपोर्ट, पैरा 257