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330 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अवधि में समझौता किए जाने की कोई आशा नहीं है ताकि आरक्षित और अंतरित विभागों में क्रमशः निधियों का समविभाजन हो सके तो गवर्नर अपने लिखित आदेश द्वारा आरक्षित और अंतरित विषयों के बीच प्रांत के राजस्व एवं शेष राशियों का आबंटन उन राजस्वों और शेष राशियों के आंशिक अनुपातों के उल्लेख द्वारा विषयों के प्रत्येक वर्ग को निर्धारित करेगा।

(2) इस नियम के अंतर्गत आबंटन का आदेश गवर्नर अपने विवेक के अनुसार या उस प्राधिकार की रिपोर्ट के अनुसार जो गवर्नर के आवदेन पत्र पर इस हेतु गवर्नर जनरल द्वारा नियुक्त किया जाएगा, जारी करेगा।

आबंटन के आदेश की अवधि

  1. इस प्रकार का प्रत्येक आदेश (जब तक शीघ्र ही उसको रद्द न कर दिया जाए) उस आदेश में उल्लिखित अवधि के लिए प्रभावकारी होगा और यह अवधि वर्तमान विधायी परिषद् की अवधि से कम न होगी तथा यह अवधि एक वर्ष से अधिक न होगी।

किन्तु गवर्नर किसी भी समय यदि उसकी कार्यकारी परिषद् और मंत्रियों की इच्छा हो, आबंटन का आदेश रद्द कर देगा अथवा ऐसा आबंटन करेगा जो उसके द्वारा सहमत किया गया है,

किन्तु यदि वह आदेश जिसके रद्द किए जाने का प्रस्ताव है, गवर्नर जनरल द्वारा नियुक्त प्राधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार पारित किया गया था तो गवर्नर को उसे रद्द करने से पूर्व गवर्नर जनरल की अनुमति प्राप्त करनी होगी।

आबंटन के आदेश की शर्त

  1. इन नियमों के अधीन आबंटन का प्रत्येक आदेश यह व्यवस्थित करेगा कि यदि नए कराधान के आरोपण के द्वारा किसी आदेश की अवधि में राजस्व में वृद्धि होती है जब तक कि विधान-मंडल अन्यथा आदेश दे, सरकार के उस भाग की सहायता के लिए आबंटित किया जाएगा जिसके द्वारा कराधान प्रारंभ किया गया है।

आबंटन के आदेश के समझौते की कमी में बजट बनाना

  1. यदि किसी बजट की तैयारी के समय कोई भी समझौता या आबंटन जैसा कि इन नियमों के द्वारा किया गया है, नहीं किया जाता तो बजट वर्ष के समाप्त होने तक बजट में आरक्षित और अंतरित विषयों के लिए क्रमशः व्यवस्थित अनुदानों के आधार पर तैयार किया जाएगा।

इस प्रकार औचित्य पर निर्भर रहने के बजाए जबकि परिस्थितियां प्रायः उत्तेजक हों तो इन नियमों के तहत मंत्रालय के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए एहतियात बरती