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परिवर्तन की समालोचना 333

में अनिच्छुक हों, गवर्नर इन काउंसिल कटौती को रोकने की स्थिति में रहे तथा गवर्नर इन मिनिस्ट्री विस्तार करने की चिंता में हो तो प्रांतीय वित्त के शीघ्र ही संतुलन करने के अवसर बहुत कम हो जाएंगे।

इसलिए यह स्पष्ट है कि प्रांतों में कोई भी ठोस वित्त व्यवस्था न हो तो इसका कारण द्विशासन है जो अच्छी प्रशासन व्यवस्था नहीं है। द्विशासन की पद्धति अच्छी सरकार क्यों नहीं है? इस प्रश्न का उत्तर अति सरल है। द्विशासन की पद्धति अहितकर सरकार बनाती है क्योंकि यह पद्धति सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के विरुद्ध है। प्रशासकीय तंत्र सुगमता और सामंजस्यता के साथ कार्य करना चाहिए। परन्तु इसे ऐसा करने के लिए सरकारी कार्य की निष्पक्षता के सिद्धांत और प्रशासकों के सामूहिक उत्तरदायित्व के क्रियान्वयन को मान्यता दी जानी चाहिए। सरकार का कार्य अपनी प्रकृति के अनुसार अविभाज्य होता है और यह तथ्यों से मेल खाते हुए दिखाई नहीं देता क्योंकि सरकार के व्यवहार में आने वाले कार्य विभाजित हो सकते हैं और आमतौर पर विभाजित होते हैं क्योंकि वे कार्य स्थानीय निकायों और विभागों के बीच सम्पन्न किए जाते हैं। फिर भी यह कहना सत्य है कि इन सभी के बीच एक ही तारतम्य रहता है। सरकार का कोई भी कार्य शून्य में नहीं होता क्योंकि प्रत्येक कार्य किसी अन्य कार्य की प्रतिक्रिया होती है और विभिन्न प्रकार के तब तक व्यवस्थित प्रगति लाने के लिए काम नहीं कर सकते जब तक कि उनमें संतुलन करने की शक्ति न हो। अन्यथा एक विभाग में निरूपति नीति अन्य विभागों की ओर से सहायक कार्यों के अभाव में सफल होने के बजाए असफल हो सकती है। संतुलन की शक्ति केवल सामूहिक उत्तरदायित्व के नियम में ही पायी जा सकती है। यह इसलिए क्योंकि इसके अंतर्गत जैसा कि हर्न ने बताया है ख्1, ःµ

‘‘प्रत्येक मंत्री अपने विभाग में अपने साथियों के मान्यता प्राप्त एजेंट के रूप

में कार्य करता है फिर भी उस विभाग में सांझा निकाय द्वारा जांच पड़ताल और

नियंत्रण के अधीन होता है। परन्तु ऐसे सभी मामलों में जिनमें किसी भी कठिनाई

के उठने की संभावना है प्रत्येक मंत्री केवल बुद्धिमत्ता के आधार पर प्रेरणा से

नहीं अपितु आदर से मंत्रिमंडल की राय लेता है। जब चेतावनी दी जाती है तो

यह कार्यवाही मंत्रालय का आम कार्य हो जाता है।’’

सही हो या गलत यह फिर भी एक आम समन्वित नीति होती है जो सामूहिक उत्तरदायित्व पर आधारित एकीकृत सरकार का मार्गदर्शन करती है। परन्तु सरकारी कार्य में विभाजन करने के बाद द्विशासन के बारे में यह कहना चाहिए कि उसने कार्यपालिका में विभाजित उत्तरदायित्व का तत्त्व प्रारंभ किया है। यह सही है कि यह विभाजन

  1. द गवर्नमेंट ऑफ इंग्लैंड, पृ. 204