334 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सपाट नहीं होता अपितु ऊर्ध्वाकार (खड़ा) होता है। यह भी सही है कि इन दोनों भागों को कार्य में स्थापित करने पर इस बात की व्यवस्था नहीं की गई है कि दो अलग-अलग कार्यपालिकाओं के लिए दो अलग-अलग विधानमंडल होने चाहिए अथवा प्रत्येक को अपने कानून बनाने चाहिए, अपने वित्त पर नियंत्रण रखना चाहिए, अपना बजट तैयार करना चाहिए, अपने कराधान लगाए जाएं अपने ऋण लिए जाएं। अथवा प्रत्येक को अपने लिए आबंटित विषयों के प्रशासन के लिए अलग-अलग स्टाफ होना चाहिए और भर्ती के अपने तरीके होने चाहिए, अपनी सेवाओं में कार्यरत व्यक्तियों के लिए अलग-अलग वेतन और पेंशन होनी चाहिए, ताकि दोनों अधिकारी वास्तव में स्पष्ट रूप से विशेष रूप से अपने कार्यक्षेत्रों की व्याखया कर सकें। वास्तव में भारत सरकार ने यह सुझाव दिया था कि यदि सभी न होकर कुछ विशेष दोहरी कार्यपालिका के इन सहवर्ती विषयों को उस द्विशासन पद्धति का अंग होना चाहिए जो प्रांतों की सरकार को चलाने के लिए स्वीकार किए जाते हैं। सौभाग्यवश देश के लिए नए संविधान के निर्माताओं ने यह निर्णय किया ख्1, ःµ
‘‘बुद्धिमत्ता इसमें है कि अलग-अलग तत्त्वों में से प्रत्येक को अपने ही समग्र
साज-सामान से सुसज्जित नहीं करना चाहिए और उनके परिक्रमा पथ पर
विश्वास करना चाहिए जो एक-दूसरे से टकराव से काफी दूर रखे जाते हैं,
परन्तु ऐसे प्रत्येक अवसर को ध्यान में रखना चाहिए ताकि इन दोनों को
समीप में लाया जाए और संयुक्त कार्यों की आदतों से प्रेरित किया जाए।’’
संयुक्त रिपोर्ट ख्2, के लेखकों ने लिखा है कि यह हमारा इरादा है कि इस प्रकार
बनाई गई सरकार और उसके अलग-अलग कार्यों को एक सरकार के रूप
में निभाया जाएगा।’’
प्रांतीय बजट सरकार द्वारा कुल मिलाकर तैयार किया जाना चाहिए। ख्3,
इसमें कोई संदेह नहीं था कि द्विशासन की कार्य पद्धति में संशोधन किया जाए और इसे दो सिद्धांतों के परस्पर कार्यों के अधीन रखा जाए। इसका एक भाग व्यवस्थित था कि यथासंभव सरकार तथा संघ के दो भागों के कई उत्तरदायित्वों की स्पष्ट परिभाषा की जाए ताकि उन दोनों भागों के बीच उद्देश्यों और नीति की साझेदारी हो। कार्यपालिका के प्रत्येक भाग को अलग-अलग साज-सामान से सुसज्जित करना किसी से क्या कम होगा। परन्तु चूंकि एक ऐसी समझ है कि जब मंत्रीगण अंतरित विषयों के मामले में कार्य करेंगे तब परामर्शदाता उन्हें सलाह देंगे और जब परामर्शदाता अंतरित विषयों के मामलों में कार्य करेंगे तब मंत्रीगण उन्हें
संयुक्त रिपोर्ट, पृष्ठ 199
वही, पृष्ठ 180
वही, पृष्ठ 207