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परिवर्तन की समालोचना 335

सलाह देंगे इससे इस तथ्य में कोई परिवर्तन नहीं होगा कि द्विशासन की पद्धति विभाजित उत्तरदायित्व की पद्धति होती है। यह ऐसी पद्धति नहीं है जो सरकार के कार्य को सामंजस्यता से चलाने तथा आम नीति के अनुसार आश्वस्त करती है। दूसरी ओर यह ऐसी पद्धति है जो संगठित झगड़े से भरपूर होती है। द्विशासन और अराजकता में विभाजन रेखा बहुत क्षीण होती है। यदि इस प्रकार की पद्धति व्यवहार में काम नहीं आती तो इसकी दो अस्थाई परिस्थितियां होती हैं। एक परिस्थिति में ऐसा प्रांतीय विधान-मंडल निहित होता है जो राजनीतिक मतभेदों द्वारा अपनी शक्ति के नष्ट होने से कमजोर हो जाता है। दूसरी परिस्थिति में मंत्रियों की अवधि निहित होती है जो विधान-मंडल की इच्छा पर निर्भर नहीं करती परन्तु विधान-मंडल की अवधि पर निर्भर करती है और जो गवर्नर की इच्छा के दौरान अपना स्थान बनाए रखती है। गवर्नर विधान-मंडल द्वारा निर्वाचित मंत्रियों को स्वीकार करने के बजाए विधान-मंडल के निर्वाचित सदस्यों में से मंत्रियों का चयन करने की अनुमति प्राप्त करे तो यह ऐसी उत्तरदायी सरकार के सिद्धांत का घोर अपमान है जो सुधार अधिनियम का प्रकट रूप से उद्देश्य है। एक मंत्री जिसे गवर्नर का विश्वास प्राप्त है और एक अन्य मंत्री जिसे विधान-मंडल का विश्वास प्राप्त है दोनों ही नितांत अलग-अलग होते हैं। जहां तक एक अच्छी सरकार का संबंध है इन दोनों के बीच कितना अधिक अंतर होता है। 18वीं और 19वीं शताब्दी के इंगलिश राजनीतिक इतिहास के पृष्ठों में यह स्पष्ट रूप से लेखबद्ध है। इस प्रकार की पद्धति विरोध के रूप में स्वीकार की जानी चाहिए जैसा कि समग्र इंगलिश संवैधानिक इतिहास में बृहद विरोध है और यह अलबत्ता किसी कारण के बिना नहीं हो सकती। इसका तथाकथित कारण बताया गया है कि ख्1, ःµ

‘‘विधानमंडल को मंत्रियों के बर्खास्त करने की शक्ति का कोई अनुभव न था

अथवा इस शक्ति के प्रयोग के परिणामों का कोई अनुभव प्राप्त था। भारत में

कोई भी व्यक्ति उन दायित्वों से अभी तक परिचित नहीं है जो प्रतिनिधित्व करने

वाली विधानसभा की इच्छा पर पद की कार्यवाही द्वारा आरोपित किए गए हों।

यह केवल वास्तविक अनुभव है कि इस स्थिति से यह सीखा जा सकता है....

(विधानमंडल) के निर्वाचित सदस्यों से मंत्रियों की नियुक्ति की युक्ति द्वारा

और उनकी सीटों के रखे जाने पर पद की शर्त कार्यावधि को बनाए रखना जो

उत्तरदायित्व के किसी कानून द्वारा एक बार स्थापित की गई हों और जो उनके

संघटक के उत्तरदायित्व के रूप में हों और इस प्रकार ऐसे मामलों की शर्त

समाप्त करने के लिए हों जिनमें उन्हें प्रशासन का उत्तरदायित्व दिया गया हो,

उन निर्वाचितों के प्रति पूर्णतया अनुत्तरदायी हैं जिन्होंने उन्हें (विधान-मंडल)

निर्वाचित किया है।’’

  1. संयुक्त रिपोर्ट, पृ. 181