30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
है वह यह कि यह बहुत से प्रांतों में इसकी दर अनिश्चित तथा अलग-अलग थी। इंग्लैंड में भूमि कर पौंड में एक शिलिंग से चार शिलिंग के बीच था अर्थात् 1798 के पूर्व सौ साल तक किराये के 5 से 20 प्रतिशत के बीच था जबकि इसे विलियम पिट द्वारा चिरस्थाई एवं शोधनीय बनाया गया था, बंगाल में भूमि कर किराये का 90 प्रतिशत निर्धारित किया गया था तथा उत्तर भारत में 1793 तथा 1822 के बीच यह किराये का 80 प्रतिशत था। यह सत्य है कि ब्रिटिश सरकार ने अपने पूर्ववर्ती मुस्लिम शासकों का अनुसरण किया जो भारी मात्रा में भूमि कर वसूल किया करते थे। लेकिन इनमें अंतर केवल यह था कि जो मुस्लिम शासक जितना कर निर्धारित करते थे वे उतना वसूल नहीं कर पाते थे, लेकिन ब्रिटिश शासक जितना कर निध ार्रित करते वे उसे कठोरता से वसूल भी करते थे। बंगाल के अंतिम मुस्लिम शासक ने अपने शासन के अंतिम वर्ष (1764) के दौरान 817,553 पौंड भूमि कर वसूल किया। जबकि ब्रिटिश शासकों इसी प्रांत में 30 वर्षों में 2,680,000 पौंड भूमि कर वसूल किया। 1802 में अवध के नवाब ने इलाहाबाद तथा उत्तर भारत के कुछ समृद्ध जिले ब्रिटिश सरकार को समर्पित कर दिये। ब्रिटिश शासकों द्वारा विजित किए गए इन जिलों से तीन वर्षों के दौरान कर 1,682,306 पौंड भूमि कर के रूप में वसूल किया। मद्रास में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा पहली बार लगाया गया भूमि कर कुल भूमि उत्पाद का आधा था। बंबई में 1817 में मराठों से जीते गये क्षेत्र में विजय के वर्ष के दौरान लगाया गया भूमि राजस्व 800,000 पौंड था, ब्रिटिश शासन के कुछ ही दिनों में बढ़ाकर यह कर 1,500,000 पौंड कर दिया गया तथा यह तब से लगातार बढ़ता गया।
‘‘विशॅप हेबर ने ब्रिटिश भारत तथा देशी राज्यों (रजवाड़ों) की यात्रा करने के बाद 1826 में लिखा कि ‘‘कोई भी भारतीय शासक इतना किराया नहीं मांगता जितना हम वसूल करते हैं।’’ भारत में इस समय विद्यमान भूमि कर के विषय में सन् 1830 में कर्नल ब्रिग्स ने लिखा ‘‘भू स्वामी के संपूर्ण कर को आत्मसात घोषित करने की बात के बारे में यूरोप व एशिया की किसी सरकार को जानकारी नहीं है।’’
‘‘बंगाल तथा उत्तर भारत के लोगों ने ब्रिटिश शासन के प्रारंभिक वर्षों में भारी भूमि करों में धीरे-धीरे कुछ राहत प्राप्त की, बंगाल में इन करों को स्थाई बना दिया गया तथा इसे खेती के विस्तार के साथ बढ़ाया नहीं गया। अब यह (सड़क तथा लोक निर्माण कार्यों पर लगाए गए करों सहित जो इस बीच किराये पर लगाया गया है) किराये पर 35 प्रतिशत के अनुपात में लगाया गया है। उत्तर भारत में इसको स्थाई नहीं बनाया गया लेकिन 1855 में सभी करों सहित इसे घटाकर 50 प्रतिशत से भी कम कर दिया गया। लेकिन नये कर शामिल कर दिए गए। कर निर्धारण की गणना