40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
चुके थे तथा तत्काल भारत सरकार को सम्राट के अधीन लाना चाहते थे और इस दोहरी सरकार के लिए एक प्रत्यक्ष सरकार प्रतिस्थापित करना चाहते थे। इसके परिणामस्वरूप न तो याचिका और न ही स्वतंत्र सार्वजनिक विचार का ही कोई प्रभाव पड़ा तथा भारत की भावी सरकार के लिए और पामर्स्टन ने कंपनी की समाप्ति के लिए अपना विधेयक प्रस्तुत किया, किन्तु इस विधेयक के पारित होने से पूर्व षड्यंत्र से पामर्स्टन की सरकार का तख्ता पलट गया। फलस्वरूप लार्ड डर्बी के नेतृत्व में कंजरवेटिव सरकार बनी। लार्ड पामर्स्टन के विधेयक के विफल होने के बाद लार्ड डर्बी के अधीन चांसलर बेंजामिन डिजराइली ने अपना ‘‘इंडिया बिल’’ प्रस्तुत किया। जॉन स्टुआर्ट मिल का इन दोनों विधेयकों का तुलनात्मक अध्ययन शिक्षात्मक है और बाद की घटनाओं से उनका मतभेद उभर कर आया।
इन विधेयकों में (एक राष्ट्र की दूसरे राष्ट्र की सरकार द्वारा) कठिनाइयों को दूर करने का जो प्रावधान है इसमें प्रस्तावित साधनों में एक मंत्री की अनियंत्रित शक्तियां निहित हैं। इन दोनों विधेयकों में लेशमात्र भी अंतर नहीं है। यह सत्य है कि मंत्री को परिषद् रखनी होती है, लेकिन अत्यंत तानाशाह की भी परिषदें होती हैं। एक तानाशाह की परिषद् तथा एक गैर-तानाशाह की परिषद् में इतना ही अंतर होता है कि एक परिषद् तानाशाह से स्वतंत्र है जबकि दूसरी उस पर आश्रित होती है। पहले विधेयक (लार्ड पामर्स्टन विधेयक) से पूरी परिषद् मंत्री द्वारा नाम-निर्देशित की जाती है। दूसरे विधेयक (डिजराइली) द्वारा आधे सदस्य इसके द्वारा नाम-निर्देशित किये जाते हैं। सौंपे गये कार्यों को कुछ अपवादों सहित मंत्री के अपने स्वविवेक पर छोड़ दिया गया है।’’
लार्ड पामर्स्टन के विधेयक से अधिक बुरी स्थिति डिजराइली के विधेयक की हुई। यह विफल हो गया। अतः अगस्त 1858 में एक नया विधेयक प्रस्तुत किया गया तथा उसे भारत में बेहतर सरकार के अधिनियम के रूप में पारित किया गया।
भारत के इस अधिनियम की (धारा 75) के उपबंध जो भारत के प्रशासन को नियंत्रित करते हैं, उनको प्रवृत्ति के अनुसार श्रेणियों में बांटा जा सकता हैµ
अतीत के मामलों से संबंध रखने वाले।
भावी मामलों से संबंध रखने वाले।
हम पहले अतीत के मामलों से संबंध रखने वाले मामलों पर विचार करेंगे, जिसमें कंपनी के मुख्यतः वित्तीय एवं व्यावसायिक दायित्वों का निपटारा होता था। ‘‘इस अधिनियम की धारा 42 में यह प्रावधान था कि ईस्ट इंडिया कंपनी के पूंजीगत स्टाक