ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रशासन और वित्त प्रबंध - Page 61

46 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

में ‘‘महारानी के भारत’’ को अधिक हानि एवं वित्तीय क्षति पहुंची है। हमें यह भली-भांति ज्ञात है कि यदि ‘‘पूर्ववर्ती’’ शब्द भी इस धारा में शामिल कर लिया गया होता तो छद्म साम्राज्यिक हितों का विरोध अथवा दलीय योजनाओं की अनिवार्यताएं भारतीय लोगों के दावों और अधिकारों का दमन करने में पर्याप्त होतीं। लेकिन इस शब्द से कम से कम यह तो राहत मिलती जिससे तर्क की आवाज तो सुनाई देती।’’ इस अधिनियम की गैर राजकोषीय धाराएं इस प्रकार थींµ

  1. ईस्ट इंडिया कंपनी के राजक्षेत्र महारानी में निहित थे, तथा ईस्ट इंडिया कंपनी

एवं नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रयोग की गई शक्तियां भारत सचिव में निहित थीं।

उसकी 15 सदस्यों की एक परिषद् होती थी जिनका कार्यकाल सद्व्यवहार

के अनुरूप होता था तथा प्रत्येक सदस्य को भारतीय राजस्व में से 1200

पौंड प्रति वर्ष वेतन के रूप में प्राप्त होते थे। भारत सचिव के वेतन तथा

उसकी स्थापना (परिषद्) का खर्च भी भारत के राजस्व से ही वसूल किया

जाता था।

  1. कुछ विशेष मामलों को छोड़कर भारत सचिव को परिषद् के बहुमत के विरुद्ध

कार्य करने के अधिकार प्राप्त थे तथा शांति एवं युद्ध के समय में जिनका

संचालन निदेशकों के कोर्ट की गोपनीय समिति के माध्यम से नियंत्रण बोर्ड

द्वारा किया जाता था। भारत सचिव को अपनी परिषद् से परामर्श किए बिना

अपने आदेशों की सूचना सदस्यों को देने तथा भारत को आदेश भेजने के

अधिकार प्राप्त थे।

  1. भारत का गवर्नर जनरल तथा मद्रास एवं बंबई के गवर्नरों की नियुक्ति अब महारानी

द्वारा की जाती थी तथा लेफिटनेंट गवर्नर की नियुक्ति महारानी की अनुमति से

गवर्नर जनरल द्वारा की जाती थी। भारत की सिविल सेवाओं में प्रतियोगिता के

माध्यम से प्रवेश के नियम भारत सचिव द्वारा निर्धारित किए जाते थे।

उपरोक्त संदर्भित प्रशासनिक धाराओं की कुटिल प्रवृत्तियां 1. निरंकुशता 2. गोपनीयता तथा 3. गैर जिम्मेदारी के रूप में निरूपित की गई हैं। ये सभी देश के अच्छे प्रशासन के प्रतिकूल मानी गई हैं। यह अत्यंत खेद का विषय है कि अधिनियम में देशवासियों की अपने देश के प्रशासन में अपनी आवाज उठाने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। इस संबंध में क्या कोई यह कह सकता है कि कंपनी का प्रशासन सम्राट के प्रशासन से भिन्न है? इस अधिनियम के प्रावधानों का प्रचार करने के लिए महारानी विक्टोरिया ने लार्ड डर्बी (जो इसके पहले मसौदे से बिल्कुल संतुष्ट नहीं थे) से घोषणापत्र जारी करने के लिए