प्राक्कथन - Page 70

प्राक्कथन

डॉ. अम्बेडकर ने अपने उत्कृष्ट शोध प्रबंध में जिस समस्या पर चर्चा की है वह विश्व के हर हिस्से में रुचि का विषय बनती जा रही है। आरंभ से ही हम पाते हैं कि केन्द्रीय और स्थानीय सरकारें बहुत अधिक वित्तीय बोझ लाद देती हैं। जैसे ही राजनीतिक संगठन का जन्म हुआ, एक ओर युद्ध के संचालन और दूसरी ओर स्थानीय सुरक्षा तथा सुविधा की जरूरत ने राज्य तथा स्थानीय अधिकारियों पर खर्चें का बोझ लाद दिया। बाद के स्थानीय और केन्द्रीय राजनीतिक संगठनों में अन्तर्विष्ट हो कर माध्यमिक संगठन उभर कर आया जिसे डॉ. अम्बेडकर प्रांतीय सरकार कहते हैं। परिव्यय की इन विभिन्न श्रेणियों को दी गई संज्ञा के बारे में स्वयं अधिकारियों में मतभेद है। भारत में हम स्थानीय, प्रांतीय और केन्द्रीय साम्राज्यिक परिव्यय कहते हैं, जर्मनी में ये स्थानीय राज्य के और साम्राज्यिक परिव्यय कहलाते हैं, अमरीका व स्विटजरलैंड में स्थानीय, राज्य और संघीय परिव्यय, आस्ट्रेलिया में स्थानीय, राज्य और राष्ट्रमंडलीय परिव्यय कहते हैं, दक्षिणी अफ्रीका तथा कन्नाडा में स्थानीय, प्रांतीय तथा संघीय परिव्यय और फ्रांस में ये स्थानीय, विभागीय तथा सामान्य परिव्यय कहलाते हैं। कुछ मामलों में जैसे कि ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत परिव्यय से कहीं अधिक व्यापक श्रेणी का विकास किया जा रहा है जिसका वहन साम्राज्य ही करेगा।

सरकार के कार्यों में बदलाव की वजह से परिव्यय की विभिन्न श्रेणियों के स्वरूप, महत्त्व और उनके परस्पर संबंधों में लगातार परिवर्तन हो रहा है। यह परिवर्तन सामान्य आर्थिक स्थितियों में बदलाव के कारण है, परिणामस्वरूप राजनीतिक संरचना अथवा प्रशासकीय क्रियाकलापों में भी धीरे-धीरे बदलाव हो रहा है। कनाडा, अर्जेन्टीना और ब्राजील जैसे कुछ देशों में प्रांत वास्तव में केन्द्र सरकार द्वारा बनाए गए हैं। अमरीका, जर्मनी तथा स्विटजरलैंड जैसे दूसरे देशों में संघीय सरकार का निर्माण मूलतः प्रभुसत्तासंपन्न राज्यों द्वारा किया गया है। कुछ देशों में मध्यवर्ती (प्रांतीय अथवा राज्य) सरकार स्थानीय अथवा केन्द्रीय सरकार की तुलना में महत्त्व खो रही है जबकि कुछ अन्य देशों में वस्तुस्थिति इसके प्रतिकूल है।

आधुनिक लोकतंत्र के तहत बढ़े हुए सरकारी क्रियाकलापों के अंतर्गत कराधान के बढ़ते बोझ और विकास इन विभिन्न प्रकार की सरकारों में बोझ को समान रूप में बांटने की समस्या बलवती होती जा रही है। माननीय अम्बेडकर जिसे निर्देशन,