66 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
की इतनी गहरी और स्पष्ट जानकारी रखते हैं ताकि देश के एक भाग के प्रभाव
को दूसरे भाग पर पड़ने की प्रक्रिया को वे आसानी से और तुरंत जान जाएं।’’ ख्1,
दूसरा मकसद देश में बसे यूरोपवासियों से प्रभावकारी ढंग से निपटने के लिए एक शक्तिशाली केन्द्रीय सरकार का गठन करना था। उल्लेखनीय है कि यदि कानून की अनिश्चितता के कारण स्थानीय जनसंख्या को कष्ट उठाना पड़ा तो ब्रिटिश जनसंख्या के लिए भी नियंत्रण कम कठोर नहीं होगा। ब्रिटिश साम्राज्य के आरंभिक दिनों में अंग्रेजों द्वारा किए गए अत्याचारों का रहस्योद्घाटन ईस्ट इंडिया कंपनी के मामलों की जांच करने के लिए 1771 में गठित हाउस ऑफ कामन्स की गुप्त-रिपोर्ट में दर्ज है। फलस्वरूप निजी ब्रिटिश नागरिकों के भारत आने और निवास बनाने को नियंत्रित करने के लिए कठोर कानून लागू किए गए। यूरोप में जन्मे किसी भी ब्रिटिश नागरिक को कंपनी अथवा भारत के गवर्नर जनरल अथवा प्रमुख आवासीय क्षेत्रों के गवर्नर की अनुमति लिए बिना भारत में प्रमुख आवासीय क्षेत्रों से 10 मील दूर आवास बनाने की अनुमति नहीं थी। ख्2, बोर्ड ऑफ कंट्रोल ख्3, द्वारा पुनरावलोकन की शर्त पर कंपनी के निदेशकों के न्यायालयों को ऐसे लाइसेंस ख्4, देने से इंकार करने के अधिकार थे। तथा भारत की सरकारों को यह स्पष्ट हिदायत थी कि विशेष परिस्थितियों ख्5, को छोड़कर वह स्वतः ब्रिटिश नागरिक को निवास की अनुमति नहीं दे सकतीं और साथ ही उन्हें उचित समझे जाने वाले मामलों में जारी किए गए ‘‘लाइसेंस’’ को भी रद्द ख्6, करने का अधिकार दिया गया। जाली अधिकार पत्रों ख्7, (लाइसेंसों) तथा अधिकार पत्रों के बिना आवास निर्माण ख्8, जैसे क्रियाकलापों को अपराध माना गया, जिसके लिए जेल की सजा अथवा जुर्माने तक का प्रावधान था और नौकरी से निकाले गए अथवा त्यागपत्र देने वाले यदि अपनी अवधि समाप्त
- हर्बर्ट कोवल की पुस्तक ‘‘द हिस्ट्री ऑफ द कांस्टीट्यूशन ऑफ कोर्ट्स एंड लेजिस्लेटिव अथोरिटी इन
इंडिया’’ कलकत्ता में उद्धृत।
33 जीओ 3, सी. 52, एस. 98
वही, एस. 38
वही, एस. 33
वही, एस. 37
53 जीओ 3, सी. 155, एस. 36
वही, एस. 120
33 जीओ 3, सी. 52, एस. 131
वही, एस. 134