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हो जाने के पश्चात् भी 10 मील की सीमा के बाहर पाए गए तो उन्हें गैर-कानूनी व्यापार करने पर अपराधी घोषित कर दिया जाता था। ख्9, बगैर अधिकारपत्रधारी ब्रिटिश नागरिकों को वापस भेज दिया जाता था। ख्1, और जिनके पास अधिकार पत्र (लाइसेंस) होता था उन्हें इस जिले की अदालत में अपना पंजीकरण करना होता था, जिस जिले में उनका निवास था। ख्2, चूंकि वे स्थानीय सरकार ख्3, के नियमों से संचालित होते थे, अतः वे ब्रिटिश भारत ख्4, अथवा अपने राज्यों ख्5, में किए गए सभी गैर-कानूनी कार्यों के लिए भारत तथा ग्रेट ब्रिटेन में न्याय प्रक्रिया से प्रभावित होते थे। बाधा पैदा करने में उन्हें अक्षम बनाने के लिए उन्हें पैतृक स्थानों के राजकुमारों ख्6,, विदेशी कंपनियों अथवा विदेशी यूरोपीय व्यापारियों को उधार धन देना अथवा धन एकत्रित करना वर्जित था। इसी प्रकार स्थानीय लोगों को विदेशियों से बचाने के लिए उन्हें विदेशियों को 12 % ब्याज की वार्षिक दर पर ऋण देना वर्जित था, ऐसा न करने पर प्रत्येक अपराध के लिए ऋण का तिगुना ख्7, रुपया दंड के रूप में काट लिया जाता था और उन्हें भारतवासियों के समस्त विवादों और अतिक्रमण ख्8, तथा बकाया मामूली कर्जों ख्9, संबंधी सभी मामलों के लिए उन्हें ‘‘जस्टिसेस ऑफ द पीस’’ के अधिकार क्षेत्र के अंदर रखा जाता था। इसके अतिरिक्त यूरोप में जन्मे प्रत्येक ब्रिटिश नागरिक के लिए अपने नौकरों, एजेंटों अथवा सहयोगियों ख्10, का अपने प्रांत के ख्11, अधिकार क्षेत्र के न्यायालय में पंजीकरण करना अत्यंत अनिवार्य था।

इन नियंत्रणों के बोझ तले दबी शासक पीढ़ी ने उनके विरुद्ध काफी क्रोध दिखाया लेकिन असफल रही। ये नियंत्रण भारतीय साम्राज्य की स्थिरता को खतरा पहुंचाने वाले तत्वों को दूर रखने के उद्देश्य से लगाए गए थे। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया और स्थानीय राजाओं पर लगातार विजय प्राप्त करने से भारतीय साम्राज्य सुसंगठित होता चला गया, इन नियंत्रणों के विरोध में कटु आलोचना की ऐसी आंधी चली कि इन प्रतिबंधों के प्रशंसक भी इनके उद्देश्यों को नकारने लगे। जबकि ब्रिटिश संसद के पास समसामयिक भावनाओं का सम्मान करने के सिवाय कोई रास्ता नहीं था। इसने उन परिणामों की अनदेखी करने से मना कर दिया जो वर्तमान सरकारी व्यवस्था

  1. 53 जीओ III, सी. 155, एस. 104

  2. वही, एस. 108

  3. वही, एस. 35

  4. 24 जीओ III, सी. 25, एस. 44

  5. 26 जीओ 41, सी. 57, एस. 67

  6. 37 जीओ III, सी. 142, एस. 28

  7. 13 जीओ III, सी. 63, एस. 30

  8. 53 जीओ III, सी. 155, एस. 105

  9. वही, एस. 106

  10. 21 जीओ III, सी. 70, एस. 13

  11. वही, एस. 16