70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
वास्तविक अर्थों में अपने घरेलू मामलों में बंगाल के अधीन थे। सच तो यह है कि मद्रास और बंबई प्रांतों को परिषद् में अपने कार्यों तथा सभी आदेशों एवं प्रस्तावों की सत्यापित नकल बंगाल सरकार को भेजनी होती थी और वे बंगाल सरकार के आदेशों को भी मानने को बाध्य थीं लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं कि वे अपने आंतरिक मामलों में बंगाल सरकार के अधीन थे, क्योंकि यह याद रखा जाना चाहिए कि बंगाल सरकार में निहित राज्य क्षेत्रातीत शक्तियों को छोड़कर बंगाल ख्1, के ही समान मद्रास और बंबई ख्2, प्रांतों को भी नागरिक एवं सैन्य सरकार चलाने तथा साथ ही अपने सीमा क्षेत्रों की संपदा और राजस्व संबंधी आदेश जारी करने तथा प्रबंधन का भी अधिकार था। बंगाल सरकार की तरह उन्हें अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों के भीतर कानून का समान तथा स्वतंत्र अधिकार प्राप्त था। अतः वास्तव में ऐसा लगता है कि वे अपने क्रियाकलापों की प्रतिलिपि बंगाल सरकार को सूचनार्थ भेजते थे ताकि आदेश के तहत वैसे भी, इस तरह का विचार बंगाल सरकार की ही देन था क्योंकि यद्यपि उन प्रांतों को आदेश देने और आज्ञा पालन करवाने का अधिकार इसके पास था लेकिन व्यवहार में बंगाल ने अपनी निगरानी और नियंत्रण ‘‘उनके द्वारा की गई गलतियों की ओर इशारा करने और न दोहराने का अनुरोध करने तक ही सीमित रखा था।’’ इससे अधिक उसे गैर जरूरी ख्3, समझा गया और संदेह ख्4, है कि क्या वह संवैधानिक था।
साम्राज्यवादी शासन व्यवस्था के साथ साम्राज्यवादी वित्त व्यवस्था अनिवार्यतः जुड़ी हुई थी। साम्राज्यवादी प्रशासकीय व्यवस्था के पूर्व विभिन्न प्रांत अलग-अलग घडि़यों के समान थे, जिनकी प्रमुख कमानी (‘‘मेन स्प्रिंग’’) वे स्वयं थे। प्रत्येक कानून बनाने तथा कराधान तथा दंड देने संबंधी शक्तियों की दृष्टि से प्रभुसत्तासंपन्न थे। वे अपनी वित्त व्यवस्था के मामले में भी स्वतंत्र थे। प्रत्येक प्रांत अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर बेहतर शासन और शांति तथा व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सेवाओं के रख-रखाव के लिए उत्तरदायी था और प्रत्येक प्रांत अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करने के लिए कर लगाने अथवा कराधान में फेरबदल करने तथा ऋण लेने के लिए स्वतंत्र था। जिम्मेदारी का निर्वाह करने के अपने तरीकों और साधनों के लिए वे अक्सर एक-दूसरे के स्रोतों पर
13 जीओ III, सी. 63, एस. 7
33 जीओ III, सी. 52, एस. 24
गवर्नर जनरल, लार्ड विलियम बेंटिक द्वारा भारत सरकार के संविधान के विषय में कार्यवृत्त, दिनांक 14
सितंबर 1831, बंगाल सरकार के सचिव द्वारा बंगाल सरकार को भेजा गया ज्ञापन जिसके साथ लार्ड
कैनिंग का दिनांक 9 सितंबर 1859 का पत्र संलग्न था जिसे सन् 1861 की हाउस ऑफ कामन्स की
कार्यवाही संख्या 307 में प्रकाशित किया गया।
- बंगाल सरकार को भेजा गया निदेशकों के कोर्ट का दिनांक 10 दिसंबर 1884 का पत्र संख्या 44, मूल
मसौदा भारतीय कार्यालय के रिकार्ड में।