रजत मानक और इसकी सममूल्यता का विस्थापन
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हों, परिणाम हानिकारक था क्योंकि विभिन्न एकत्रित देशों द्वारा प्रस्ताव को कार्यान्वित किया जाना था तो सिक्के की समरूपता के बारे में सम्मेलन का वास्तविक अंत पूर्णतया ओझल हो गया और प्रस्तावित क्रियान्वयन अंततः वास्तविक रूप से समाप्त हो गए। जैसे ही यह कार्य अग्रसर हुआ, वैसे ही चांदी के विमुद्रीकरण के कार्य में तीव्र गति आती गई। इस क्षेत्र में जर्मनी का प्रथम स्थान था। 1870 के युद्ध में फ्रांस को परास्त करने के बाद उस देश ने युनाइटेड एम्पायर ऑफ जर्मनी के लिए सोने की मुद्रा को अपनाने की जल्दबाजी कर अपनी अव्यवस्थित मुद्रा ख्1, के सुधार में युद्ध की क्षतिपूर्ति का उपयोग किया। 4 दिसम्बर, 1871 के कानून ने मुद्रा की यूनिट के रूप में मार्क के साथ इस परिवर्तन को प्राधिकृत किया। इस अधिनियम द्वारा चांदी का विमुद्रीकरण किया गया, परंतु मौजूदा चांदी के सिक्के विधिमान्य चलार्थ बने रहे यद्यपि उनके मापी सिक्के ढालने पर रोक लग गई और इसके साथ ही साथ 15 से ½ से 1 तक अनुपात में सोने के नये सिक्कों के ढालने पर भी रोक लगा दी गई। चांदी के सिक्कों की पूर्ण विधिमान्य चलार्थ स्वरूप 9 जून, 1873 के कानून द्वारा उनसे छीन ली गई। जिसके फलस्वरूप उनकी स्थिति सहायक मुद्रा ख्2, तक कर दी गई। शीघ्र ही इस नीति को जर्मनी संस्कृति के प्रभावित देशों ने भी अपना लिया। ख्3, 1872 में नार्वे, स्वीडन और डेनमार्क ने स्केडेनेवियाई मुद्रा संघ बनाया जो लेटिन मुद्रा संघ के सदृश्य था। इसके द्वारा उन्होंने चांदी के विमुद्रीकरण पर सहमति की जैसा कि जर्मनी द्वारा सहमति की गई थी। इस समझौते में सोने के मानक की स्थापना की गई और वर्तमान चांदी मुद्रा को सहायक प्रतिष्ठा के रूप में ढाल दिया गया तथा 1873 में स्वीडन और डेनमार्क और 1875 में नार्वे द्वारा इसकी अभिपुष्टि की गई। हालैंड ने भी इसी मार्ग की अनुसरण किया। 1872 तक इसका विशुद्ध चांदी मानक था। उस वर्ष हालैंड ने स्वतंत्र रूप से सिक्का ढालने के लिए अपनी टकसाल बंद कर दी यद्यपि पुरानी चांदी की मुद्रा किसी भी राशि तक विधिमान्य चलार्थ बनी रही। 1875 में हालैंड ने एक कदम आगे बढ़ाया और अपनी टकसालों में स्वतंत्र रूप से स्वर्ण मुद्रा ढालने का काम किया। हालैंड की नीति जर्मनवादी देशों से कहीं अलग थी। उस नीति के अनुसार हालैंड ने चांदी के स्वतंत्र रूप से सिक्के ढालने का काम आस्थगित कर दिया जबकि जर्मनवादी देशों ने इसका विमुद्रीकरण कर दिया। यहां तक कि लेटिन संघ चांदी के विरुद्ध इस ज्वार का सामना करने के लिए असमर्थ था। चांदी के इस अपवर्जन के फलस्वरूप लेटिन संघ में अतिरिक्त सदस्यों के साथ
- 1870 से पूर्व जर्मन मुद्रा के एकीकरण के लिए इस आंदोलन के लिए देखिए एच.पी.विलीसµ‘‘दि
वियाना मोनेटरी ट्रीटी ऑफ 1857’’ दि जर्नल ऑफ पालिटिकल इकोनॉमी, खंड IV, पृष्ठ 187 और
नीचे दिया हुआ।
- कानून के पाठ के लिए देखिए प्रोफेसर जे.एल.लांघलिन द्वारा लिखित पुस्तकµ‘‘हिस्ट्री ऑफ बायमेटेलिज्म’’
का अनुलग्नक, न्यूयार्क, 1886
- देखिए रिपोर्ट ऑफ दि कमेटी ऑन दि डेप्रिसियेशन ऑफ सिल्वर 1876ए पृ. XXIX