रजत मानक और इसकी सममूल्यता का विस्थापन
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साथ रूस ने 1876 में चांदी के स्वतंत्र रूप से सिक्के ढालने का कार्य स्थगित कर दिया। किंतु अपवाद यह था कि यह कार्य उस राशि तक किया जाना था जिसकी आवश्यकता चीन के साथ उसे अपने व्यापार के प्रयोजनों के लिए थी। ख्1, और 22 नवम्बर, 1878 की इम्पीरियल डिग्री ने यह निवेश किया कि 5 रुबल और 15 कॉपिक से ऊपर सभी-शुल्क सोने ख्2, में भुगतान किए जाने चाहिए। इसी प्रकार आस्ट्रिया ने भी 1879 ख्3, में स्वतंत्र रूप से सिक्का ढालने का काम स्थगित कर दिया।
अंध महासागर के दूसरी ओर संयुक्त राज्य अमेरिका में एक अन्य महत्वपूर्ण घटना घटी। 1870 में सरकार ने टकसाल के कानून को समेकित करने का इरादा किया जो 1837 से संशोधित नहीं किए गए थे और उन्हें व्यापक कानून में समेकित नहीं किया गया था। 1853 के कानून के अनुसार चांदी डॉलर ही केवल ऐसा सिक्का था जिसे अमरीका की टकसालों में स्तवंत्र रूप से ढाला गया था। परंतु 1873 के समेकित टकसाल कानून के अनुसार चांदी में डॉलर टकसाल से जारी किए जाने वाले सिक्कों की सूची से निकाल दिया गया और इससे वास्तव में अमरीका में चांदी के स्वतंत्र रूप से सिक्का ढालने का कार्य स्थगित हो गया। ख्4, इससे पूर्व चांदी के जो डॉलर ढाले गए थे, वे विधिमान्य चलार्थ के रूप में परिचालित होते गए परंतु जून, 1874 के कानून द्वारा यह अधिकार छीन लिया गया जिसमें यह घोषित किया गया कि ‘‘अमरीका में चांदी के सिक्के भुगतान में पांच डालरों से अनधिक राशि के नाम मात्र के मूल्य के लिए जाएंगे।’’
सोने और चांदी के तुलनात्मक मूल्यों के विस्थापन के कारणों में सोने की तुलना में चांदी के उत्पादन में अधिक वृद्धि होना भी संभावित कारण प्रतीत होता।
- रिपोर्ट ऑफ द डायरेक्टर्स ऑफ दि मिंट (टकसाल के निदेशकों की रिपोर्ट), वाशिंगटन, 1893, पृ.
23
- देखिएµपी. विलीस ‘‘मोनेटरी रिवर्स इन एशिया (रूस में मुद्रा संबंधी सुधार)’’ जर्नल ऑफ पालिटिकल
इकोनॉमी, खंड V पृष्ठ 291
- देखिए µएफ वीसर, ‘‘रिजम्पशन ऑफ स्पेसी पेमेंट इन आस्ट्रिम-हंगरी’’ इन जर्नल ऑफ पालिटिकल
इकोनॉमी, खंड-एक, पृष्ठ 380-7
- यह कदम विचित्र विवाद का विषय था। सोने के पक्षधर लोगों ने यह तर्क दिया कि इसे समझ-बूझकर
अंगीकार किया गया था। जबकि पक्षधर लोगों ने इसे एक चोरी-छिपे कार्य धूर्ततापूर्ण सोचने व धूर्तता-पूण्
ार् षड्यंत्र का मिश्रण बताया। प्रोफेसर लाफलिन ने इस अधिनियम के घिरे रहस्य को भलीभांति स्पष्ट
किया। उन्होंने 1853 के विधान पर कांग्रेस में की गई बहस के संदर्भ में यह बताया कि कांग्रेस को यह
पता था कि सोने और चांदी के बीच अनुपात के परिवर्तन को इन्कार कर वे देश को सोने के मानक
पर रख रहे थे। उनके विचार से 1873 के अधिनियम पर व्यर्थ में बहुत अधिक विचार विनिमय हुआ है
जिसमें केवल 1853 के अधिनियम के परिणामों के कानूनी पक्ष पर ध्यान दिया। देखिएµउनका लिखित
ग्रंथµहिस्ट्री ऑफ वाइमैटालिज्म (द्विधातुवाद का इतिहास) पृ.80 और 93-95