94 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
एक वस्तु हों और वाणिज्य की आवश्यकताओं से परे किसी भी पद्धति में मांग अथवा आपूर्ति में चाहे कुछ भी परिवर्तन क्यों न हों, वे स्वयं मूल्य के स्तर में ठीक उसी प्रकार प्रकट करते हैं जैसे उनमें से एक मुद्रा माध्यम ही था, परंतु उनके विनिमय का अनुपात प्रत्येक दशा में अविकल सुरक्षित किया जाएगा।
इसके समर्थन में जेवन्स के कथन को उद्धृत किया गया जिन्होंने कहा था ख्1, ःµ
‘‘जब कभी अलग-अलग वस्तुएं इस प्रकार समान प्रयोजनों के लिए लागू होती हैं तब उनकी मांग और विनिमय की शर्तें स्वतंत्र नहीं होतीं। उनके विनिमय का परस्पर अनुपात अधिक भिन्न नहीं हो सकता क्योंकि उनकी उपयोगिताओं के अनुपात द्वारा उसे समीप से परिभाषित किया जाएगा। गोमांस और भेड़ के मांस में बहुत कम अंतर होता है और लोग उन्हें लगभग बिना किसी अंतर से खाते हैं परंतु भेड़ के मांस का थोक मूल्य गोमांस की तुलना में औसतन 9ः8 से अधिक होता है और इसलिए हमें यह निष्कर्ष निकालना चाहिए कि लोग सामान्यतया इस अनुपात में गोमांस को भेड़ के मांस की अपेक्षा अधिक आदर देते हैं अन्यथा वे महंगा मांस नहीं खरीदेंगे---------- जब तक कि उपयोगिता का समीकरण सत्य हो तब तक भेड़ के मांस और गोमांस के बीच के विनिमय का अनुपात 8ः9 से अलग न होगा। यदि गोमांस की सप्लाई कम हो जाती है तो लोग इसके लिए ऊंची कीमत अदा नहीं करेंगे परंतु भेड़ का अधिक मांस खाएंगे, और यदि भेड़ के मांस की सप्लाई कम हो जाती है तो लोग अधिक गोमांस खाएंगे--------- वास्तव में हमें गोमांस और भेड़ के मांस को दो अलग-अलग शक्तियों की एक वस्तु मानना चाहिए जैसे 18 कैरेट सोना और 20 कैरेट सोना शायद ही दो माने जाते हैं परंतु उन्हें एक ही वस्तु समझा जाता है जिनमें एक के 20 अंश दूसरे के 18 अंशों के बराबर होते हैं।
‘‘इसी सिद्धांत के अनुसार हमें केयरनैस के विचारों के समान सोने और चांदी के विनिमय के अनुपात के स्थायित्व की व्याख्या करनी चाहिए जो 18वीं शताब्दी से प्रारंभ होकर हाल ही के वर्षों तक 15ः1 से कभी भी विचलित नहीं हुआ। अनुपात की यह स्थिरता नितांत रूप से उत्पादन की राशि अथवा लागत पर निर्भर नहीं हुई और इसे आस्ट्रेलियाई तथा कैलीफोर्नियाई सोने की खोजों के बहुत कम प्रभाव द्वारा सिद्ध किया जाता है जिसने कभी भी चांदी के सोने की कीमत को लगभग 4 ख्2/3,» से अधिक नहीं बढ़ाया और 1 ½ » के स्थायी प्रभाव से अधिक प्रतिशत बढ़ाने में असफल हुआ। यह तुलनात्मक मूल्यों की स्थिरता अंशतः इस तथ्य के कारण हो सकती है कि सोने और चांदी को सही अर्थ में एक जैसे प्रयोजनों के लिए काम में लाया जा सकता हैं परंतु सोने की अधिक चमक कई अवसरों पर अच्छी मानी जाती है जब
- थियोरी ऑफ पालिटिकल इकोनॉमी चौथा संस्करण, 1911 पृष्ठ 134-136