96 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
चांदी के संबंधों में गड़बड़ को दूर करने में महत्वपूर्ण प्रभाव का श्रेय प्रतिस्थापन के कानून को दिया है।’’ यह बात मान भी ली जाए कि 1873 से पूर्व यह अनुपात कि द्विधातु के कानून की क्षतिपूरक कार्रवाई के कारण सुरक्षित रखा गया तो क्या यह कहा जा सकता है कि इसे 1873 के बाद अनुरक्षित किया जाना था यदि कानून को आस्थगित नहीं किया जाता? समझौता न किए जाने वाली सकारात्मक स्थिति, जैसी कि द्विधातु के समर्थकों ने पैदा की, को बनाए रखना यह मानना है कि द्विधातुवाद सभी दशाओं में कार्य कर सकता है । सच बात तो यह है कि यद्यपि यह कुछ स्थितियों में काम कर सकता है। यह दूसरी, परिस्थितियों में काम नहीं कर सकता है। इन सभी दशाओं का अच्छा विवरण प्रोफेसर फिशर द्वारा किया गया है। ख्1, द्विधातुवाद के अंतर्गत प्रश्न यह है कि क्या सोना और चांदी के बुलियन के बीच बाजार का अनुपात वही होगा जो उन सोना और चांदी के सिक्कों के बीच होता है जो स्वतंत्र रूप से सिक्कों में ढाले जाते हैं और जिनमें असीमित विधिमान्य चलार्थ शक्ति होती है। अब यह मान लिया जाए कि सोने के बुलियन की तुलना में चांदी के बुलियन की आपूर्ति में वृद्धि की गई है तो स्पष्ट रूप से टकसाल और बाजार के अनुपात में भिन्नता होगी। क्या द्विधातु के कानून में क्षतिपूरक कार्रवाई संतुलन को पुनःप्रतिष्ठित कर सकती है? ऐसा करने में यह सफल भी हो सकती है अथवा असफल भी हो सकती है। यदि चांदी के बुलियन की आपूर्ति में वृद्धि होती है और सोने के बुलियन में कमी होती है और ये दोनों इस प्रकार हों कि चांदी की मुद्रा में ढालने से ज्योंही ये कमी आ आए तथा सोने को मुद्रा से निकालने से सोने में वृद्धि आ जाए तो उन दोनों को बुलियन के समान पुराने स्तर पर लाया जा सकता है और इस प्रकार द्विधातुवाद में सफलता
- ‘‘एलीमैंट्री पिं्रसिपल्स ऑफ इकनॉमिक्स, 1912 पृ. 228-291 प्रोफेसर फिशर ने जो रेखाचित्र दिए हैं
उनमें उनका कहना है कि यद्यपि वह यह अर्थ नहीं लगाते कि द्विधातुवाद की सफलता या असफलता
इस प्रश्न पर आधारित है कि क्या दोनों धातुएं परिचालन के लिए अनुरक्षित की जाती हैं या नहीं की
जातीं। ऐसे रेखाचित्र के लिए जिसमें वे द्विधातुवाद की असफलता दिखाते हैंµआकृति 14(ख) µउनकी
फिल्म (एक) यह प्रदर्शित करती है कि सोने को परिचालन से पूर्णतया अलग कर दिया गया है_
जबकि रेखाचित्र में उन्होंने द्विधातुवाद की सफलता प्रदर्शित की हैµआकृति 15(ख) उनकी फिल्म
(एफ) यह प्रदर्शित करती है कि सोने को केवल आंशिक रूप से परिचालन से बाहर किया गया है।
परंतु ऐसा कोई कारण नहीं लगता ताकि यह मान लिया जाए कि कोई तीसरी संभावना नहीं हो सकती
अर्थात् कि जब आकृति 14(ख) के अनुसार फिल्म की स्थिति एक होती हैµ यह एक ऐसी संभावना
है जिसमें द्विधातुवाद की सफलता निहित है यद्यपि दोनों धातुओं में से एक धातु पूर्णतया परिचालन
से बाहर हो जाती है। द्विधातुवाद की सफलता के लिए यह आवश्यक नहीं है कि दोनों धातुओं को
परिचालन में रहना चाहिए। इसकी सफलता इस बात पर आधारित है कि क्या दोनों सिक्कों के बीच
वैध रूप से स्थापित दोनों सर्राफों के तुलनात्मक मूल्यों को फिर से लाने में क्षतिपूरक कार्रवाई की जाए
अथवा न की जाए। यदि इसे उसकी उपलब्धि में सफलता मिलती है तो अनुपात सुरक्षित रखा जाएगा
चाहे क्षतिपूरक कार्रवाई किसी एक धातु को पूर्णतया परिचालन से बाहर कर दे।