3. रजत मानक और इसकी अस्थिरता के दोष - Page 125

110 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अधिक वृद्धि कर दी गई थी कि उस समय वह एक असाधारण स्तर की वृद्धि प्रतीत हुई। लूट खसोट के पहले ऐसे उदाहरणों को चेतावनियों के रूप में प्रस्तुत किया गया जो भली-भांति यह दर्शाता था कि, विनिमय से हानि के कारण सिविल सर्वेन्टस में बहुत असंतोष था।

इस गिरावट का देश के व्यापार तथा उद्योग पर बिल्कुल अलग प्रभाव पड़ा था। सरकार के कारबार या इंग्लैंड जैसे स्वर्णमान वाले देश के व्यापार तथा उद्योग की तुलना में यहां का व्यापार व उद्योग समृद्ध अवस्था में था। जिन दिनों चांदी गिर रही थी, उस समस्त अवधि के दौरान तुलनात्मक दृष्टि से इंग्लैंड में जनसंख्या का अनुपात जो विभिन्न उद्योगों तथा व्यापारों व व्यवसायों में लगा था, उसमें भी उत्तरोत्तर गिरावट आ रही थी। वस्त्र निर्माण तथा लोहे और कोयले के व्यापार, महत्वपूर्ण व्यापारों जैसे बरमिंघम तथा शेफील्ड के लोहे के सामान का निर्माण, ग्रीनोक, लिवरपूल एवं लंदन में चीनी परिष्करण, मिट्टी के बर्तनों, शीशे, चमड़े, कागज के निर्माण तथा अनेक छोटे उद्योगों में मंदी आ गई थी। ख्1, इंग्लैंड की कृषि में मंदी आ गई थी कि 1892 में आयुक्त (कमिश्नर) देश में ऐसा कोई भाग नहीं बता सके, जिसके संबंध में यह कहा जा सके कि उसमें (मंदी का प्रभाव) नहीं है।’’ और यद्यपि, कृषि की दृष्टि से मौसम 1882 से कुल मिला कर संतोषजनक था, पर फिर भी यह मंदी थी। ख्2, परंतु भारतीय व्यापार तथा उद्योग में इसके बिल्कुल प्रतिकूल बात थी। देश के विदेश व्यापार में अमरीकी सिविल युद्ध के दौरान उछाल आया था उसमें 1870 के बाद

तालिका XIV

आयात तथा निर्यात (माल तथा खजाना दोनों)ऽ

वर्ष­ निर्यात रुपये­ आयात रुपये ­ वर्ष­ निर्यात रुपये­ आयात रुपये ­

1870-71­ 57,556,951­ 39,913,942­ 1881-82­ 83,068,198­ 60,436,155­ 1871-72­ 64,685,376­ 43,665,663­ 1882-83­ 84,527,182­ 65,548,868­ 1872-73­ 56,548,842­ 36,431,210­ 1883-84­ 89,186,397­ 68,157,311­ 1873-74­ 56,910,081­ 39,612,362­ 1884-85­ 85,225,922­ 69,591,269­ 1874-75­ 57,984,549­ 44,363,160­ 1885-86­ 84,989,502­ 71,133,666­ 1875-76­ 60,291,731­ 44,192,378­ 1886-87­ 90,190,633­ 72,830,670­ 1876-77­ 65,043,789­ 48,876,751­ 1887-88­ 92,148,279­ 78,830,468­ 1877-78­ 67,433,324­ 58,819,644­ 1888-89­ 98,833,879­ 83,285,427­ 1878-79­ 64,919,741­ 44,857,343­ 1889-90­ 105,366,720­ 86,656,990­ 1879-80­ 69,247,511­ 52,821,398­ 1890-91­ 102,350,526­ 93,909,856­ 1880-81­ 76,021,043­ 62,104,984­ 1891-92­ 111,460,278­ 84,155,45­

ऽ1898 की भारतीय मुद्रा स्फीति की रिपोर्ट के परिशिष्ट 2 (सं.1 व 2) से

  1. रॉयल कमीशन की डिप्रेशन ऑफ ट्रेड एंड इन्डस्ट्री पर अंतिम रिपोर्ट में डनरोयन, फेरर तथा ल्युबोक

द्वारा रिपोर्ट, पैरा 54 सी-4893

  1. ‘‘इंग्लैंड में कृषि मंदी’’ पर रॉयल कमीशन की अंतिम रिपोर्ट-1897 की सी 8540, पैरा-28