3. रजत मानक और इसकी अस्थिरता के दोष - Page 126

रजत मानक तथा इसकी अस्थिरता के दोष

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और अधिक उछाल व वृद्धि दिखाई दी और विनिमय की गिरावट वाली अवधि के दौरान उसमें विकास व वृद्धि तीव्र गति से जारी रही। बीस वर्ष की छोटी सी अवधि के दौरान देश के कुल आयात तथा निर्यात की मात्रा दुगुनी हो गई, जैसा कि तालिका XIV में दर्शाया गया हैः (पिछले पृष्ठ पर देखें)

तालिका XV

इंग्लैंड तथा भारत में औद्योगिक व्यवसाय का स्वरूपऽ

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Col3 Col4 Col5 Col6 [ktkus ds vfrfjDr baXySaM ds
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ऽ भारत के लिए आंकड़े स्टेटिस्टिकल ऐब्सट्रैक्ट फॉर इंडिया, सैकंड नम्बर (1857-1866) टेबल नम्बर

34, एंड दि एटम नम्बर (1864-1873), टेबल नम्बर 24 इंग्लैंड के लिए आंकड़े रायल कमिशन में

व्यापार और उद्योग में मंदी संबंधी प्रथम प्रतिवेदन, 1885 के परिशिष्ट-सी (स्टेटमेंट-6) से लिए गए हैं।

इस उतार-चढ़ाव से कि ‘‘निर्मित’’ ‘‘आंशिक रूप से निर्मित’’ के अांकड़े मूल विवरण में ‘‘निर्मित’’

के अंतर्गत वर्गीकृत किए गए हैं। भारतीय किस्तों के अंतर्गत ‘‘अवर्गीकृत वस्तुएं’’ अधिकांश रुप में

आभूषणों के बारे में हैं।