रजत मानक तथा इसकी अस्थिरता के दोष
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था। यूरोप के प्रतिद्वन्द्वियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में उनकी असमर्थता का कारण, यूरोपीय देशों में रक्षात्मक शुल्कों तथा आर्थिक सहायता का प्रचलन था जो यूरोपीय देशों की औद्योगिक तथा व्यापारिक संहिता का एक आवश्यक अंग था। भारत में उस समय इस प्रकार की कोई व्यवस्था विद्यमान नहीं थी। यहां पर व्यापार बहुत अधिक मुक्त था और उद्योग बहुत अधिक असंरक्षित था। फिर भी, लंकाशायर के रूई बुनकरों/ कताई करने वालों, डुंडी के जूट निर्माताओं तथा अंग्रेज गेहूं उत्पादकों ने यह शिकायत की कि वे भारत में अपने प्रतिद्वंद्वियों के साथ प्रतिस्पर्द्धा नहीं कर सकते।
तालिका- XIX
भारत के कृषि उपज के निर्यात की वृद्धि
| | 1868&69 | 1873&74 | 1877&78 | 1882&83 | 1887&88 | 1891&92 |
|---|---|---|---|---|---|---|
| xsgwa viQhe Ckht pkoy Ukhy pk; dkiQh |
100 100 100 100 100 100 100 |
637-41 118-38 111-26 131-66 116-91 169-35 86-04 |
2]313-47 123-83 305-87 119-84 121-57 293-17 69-98 |
5]152-36 122-47 239-97 203-28 142-17 507-25 85-31 |
4]914-37 120-20 403-60 185-55 140-76 775-09 64-59 |
11]001-44 116-82 480-99 220-36 126-33 1]075-75 74-11 |
इसका कारण, विनिमय में गिरावट को माना जाता था। ख्1, इस विचार से कुछ लोग इतने अधिक प्रभावित थे कि वे सुदूर पूर्व में भारतीय व्यापार के प्रसार का श्रेय भी इसी कारण को देते थे। पहले यह दोषारोपण किया जाता था कि स्वर्ण तथा रजत के बीच विनिमय के अंकित मूल्य की गड़बड़ ने स्वर्ण का प्रयोग करने वाले देशों तथा चांदी का प्रयोग करने वाले देशों के बीच एक प्रकार से इतनी पृथकता उत्पन्न कर दी थी कि उन्होंने एक-दूसरे का बहिष्कार कर दिया था। एक ही धातु को मान/मूल्य के रूप में प्रयोग करने वाले दो देशों के बीच सौदे के संबंध में, यह कहा जाता था कि एक-दूसरे रूप में परिवर्ती दो धातुओं के प्रयोग से उत्पन्न अनिश्चितता को समाप्त कर दिया गया था। ऐसे दो देशों के बीच व्यापार भिन्न-भिन्न मूल्यों/मानों का प्रयोग करने वाले दो देशों के बीच व्यापार की तुलना में कम जोखिम पर तथा कम असुविधा के साथ किया जा सकता था। भिन्न-भिन्न मानों का प्रयोग करने वाले देशों के मामले में चूंकि अनिश्चितता प्रत्येक सौदे में होती थी और उसे उस प्रक्रिया के
खर्चे में जोड़ दिया जाता था जिसके द्वारा व्यापार को दूसरी दिशा में मोड़ दिया जाना
- स्वर्ण तथा रजत पर रॉयल कमीशन की अंतिम रिपोर्ट भाग1, पैरा 99-101 बहस के सारांश के लिए।