4. स्वर्ण मानक की ओर - Page 149

134 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(भारत में) भुगतान के लिए मुद्रा को उसके पूर्ववर्ती मूल्य पर पुनर्स्थापित करने में अधिक देर नहीं है और वह भी बिना किसी हानि या अव्यवस्था या गड़बड़ के। मुख्य कदम निजी खाते में चांदी के सिक्कों पर रोक लगानी होगी साथ ही साथ इसके लिए चांदी के सिक्कों के आयात को हतोत्साहित करने तथा कम से कम विदेश में निर्मित चांदी के सिक्कों के वितरण व प्रचलन को रोकने और सिक्कों के लिए स्वर्ण बुलियन प्राप्त करने के लिए टकसाल खोलने के उपाय करने होंगे।

‘‘7. इस बात को समझाने के लिए यह कैसे किया जाएगा, मुझे यह कहना है किµ

‘‘8.....भारतीय साम्राज्य के आंतरिक व्यापार में वृद्धि हुई है और उसमें वृद्धि हो रही है......

‘‘9. कारण चाहे जो हो, इस शताब्दी के आरंभ से ही भारत के आंतरिक व्यापार को अपनी मुद्रा में निरंतर स्थायी तथा स्थिर वृद्धि की आवश्यकता रही, जिसका औसत पिछले अड़तीस वर्ष के दौरान, मूल्य में प्रतिवर्ष पचास लाख पाउंड स्टर्लिंग से अधिक था। इसके अतिरिक्त लाभ से यह पता चलता है कि उसी अवधि के दौरान, स्वर्ण बुलियन के निर्यात से आयात प्रति वर्ष औसतन पच्चीस लाख पाउंड अधिक होता था, यह पिछले बीस वर्ष के दौरान चालीस लाख से अधिक रहा।

‘‘10. ऐसी स्थिति में इसका यह आवश्यक परिणाम होना प्रतीत होता है कि यदि रुपये की आपूर्ति को बद कर दिया जाए तो वस्तुओं की तुलना में, शेष बची राशि के स्थानीय मूल्य में उस समय तक वृद्धि होनी चाहिए जब तक वे उस स्थिति को पुनः प्राप्त नहीं कर लेते जो स्थिति उनकी स्वर्ण के बराबर अर्थात् 1870 से पहले पंद्रह वर्ष तक प्रति सॉवरेन दस रुपये की दर पर थी।

‘‘11. इस स्थिति पर पहुंचने के बाद, व्यापारियों की इस बात में रुचि होगी कि वे सोने को सिक्कों की ढलाई के लिए भारतीय टकसालों में ले जाएंगे और वे वास्तव में ऐसा अधिमूल्य या बट्टे के कारण विनिमय में सुधार होने से पहले ही करेंगे। जो कि उन्हें पहले सोने के सिक्कों के बदले में प्राप्त होगा।

‘‘12. इस साधन द्वारा सोना धीरे-धीरे भारत में लाया जाएगा और जैसा कि दर्शाया गया है कि वितरण होने वाले माध्यम में कम से कम पचास लाख पाउंड की प्रतिवर्ष वृद्धि आवश्यक होगी तथा (मुद्रा में) चांदी के और सिक्कों को स्वीकार नहीं किया जाएगा, तो वह धीरे-धीरे वहां संचित हो जाएगा।

‘‘13. अतएव यह प्रस्ताव है कि उचित सूचना के बाद, निजी व्यक्तियों की ओर से चांदी के सिक्कों तथा चांदी बुलियन पर पेशगियों का स्थगित कर दिया जाना चाहिए, 1870 के अधिनियम 23 के उस भाग को अस्वीकार किया जा रहा है, जो उसे प्राप्त करना और उसके सिक्के बनाना सरकार के लिए अनिवार्य बनाता है, सरकार को जब भी उचित महसूस होगा तभी चांदी की मुद्रा की पुनः पूर्ति कर