4. स्वर्ण मानक की ओर - Page 151

136 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इसके तत्काल परिणाम काफी गंभीर हैं......परन्तु जो बात इसके लिए महत्वपूर्ण है वह यह है कि इसका अंत देखा नहीं जा सकता, भविष्य अनिश्चितता के घेरे में है। ख्1,

ऐसी परिस्थिति में इससे अधिक स्वाभाविक कुछ नहीं हो सकता सिवाय सरकार से यह आशा करने के कि सरकार यदि दूसरों को नहीं तो कम से कम स्वयं को आसन्न संकट से बचाने के लिए कोई कार्रवाई करे। तत्काल कदम उठाने के बजाए सरकार किसी प्रकार की पहल या अगुआई करने में केवल असफल ही नहीं रही, बल्कि जब उस पर बंगाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा पूर्वोक्त प्रस्ताव पर कार्रवाई करने का जोर डाला गया तो उसने केवल आश्चर्यजनक रूप में एक उदासीन दर्शक की तरह अव्यवहारिक उम्मीदी दिखायी । इसमें संदेह नहीं कि बंगाल चैम्बर का प्रस्ताव दोषपूर्ण था, उसमें उसने यह सुझाव नहीं दिया कि सोने के सिक्के बनाने के लिए भारतीय टकसाल खोली जाए। भारत सरकार इस कमी को पकड़ कर चालाकी से बैठ गई। उसने चैम्बर के समक्ष यह स्पष्ट कर दिया था कि यदि उसने स्वर्ण के मुक्त सिक्के ढलाई का प्रस्ताव किया होता तो ‘‘ऐसी सिफारिश पर वह आपत्ति न होती जो वास्तविक रूप में अपनाए गए प्रस्ताव के अपनाने के लिए अप्रत्यक्ष रूप में घातक प्रतीत होती हैµ जैसे टकसालों को एक धातु के वैध मुद्रा में मुक्त सिक्के ढालने के लिए अस्थायी रूप में बंद करना और इसके साथ ही साथ किसी दूसरी धातु के वैध मुद्रा में मुक्त रूप से सिक्के ढालने के लिए टकसालों को न खोलना।’’

फिर, क्या उसने उस समय, कर्नल स्मिथ के उस प्रस्ताव को अपनाया जिसमें ऐसी सिफारिश की गई थी? बिल्कुल नहीं। तो फिर उसने कोई ऐसा उपाय क्यों नहीं अपनाया जिसमें उसे कोई आपत्ति दिखाई नहीं देती थी? इसका कारण यह था कि उसने मुद्रा संबंधी गड़बड़ के कारणों के विभिन्न निदानों का पता कर लिया था। सरकार को, ‘‘मूल्यवान धातु के संतुलन में गड़बड़’’ की व्याख्या करने की अनेक तथा विविध प्रकार की संभावनाएं दिखाई दी। ख्2, (1) सोने का मूल्य अपरिवर्तनीय था, चांदी के मूल्य में गिरावट आ गई थी। (2) चांदी के मूल्य में कोई परिवर्तन नहीं हुआ था, सोने के मूल्य में वृद्धि हो गई थी। (3) सोने के मूल्य में वृद्धि हो गई थी और चांदी के मूल्य में गिरावट आ गई थी। (4) दोनों धातुओं के मूल्य में वृद्धि हो गई थी, परंतु सोने के मूल्य में चांदी के मूल्य की अपेक्षा अधिक वृद्धि हुई थी। (5) दोनों धातुओं के मूल्य में गिरावट आई थी, परन्तु चांदी के मूल्य में सोने के मूल्य की अपेक्षा अधिक गिरावट आई थी। ऐसी संभावनाओं के बीच जहां तर्क की अपेक्षा पांडित्य प्रदर्शन अधिक था वहां सरकार ने मुद्रा के सुधारकों को चेतावनी दी किµ

  1. पृष्ठ 93

  2. चांदी के मूल्यह्रास के संबंध में दिनांक 22.9.1876 का भारत सरकार का संकल्प देखें 6, कामंस पेपर

1893 का 449

  1. कामन्स पेपर 1893 का 449