स्वर्ण मानक की ओर
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के संबंध में पराभूत होकर उसने 1878 में ‘‘ब्लैंड एलिसन अधिनियम’’ नामक एक कानून पारित किया। इस कानून के अनुसार सैक्रेटरी ऑफ दि ट्रेजरी (कोषागार सचिव) के लिए यह आवश्यक हो गया कि वह प्रतिमास 2,000,000 डालर से 4,000,000 (चालीस लाख) डालर तक के मूल्य के चांदी बुलियन, मानक रजत डालर में खरीदे और उनके सिक्के बनाए जो पूर्णतया विधिमान्य मुद्रा हो और इनका उपयोग ‘‘जहां संविदा में अन्यथा स्पष्ट रूप में अनुबद्ध किया गया हो, इस स्थिति को छोड़कर’’ ख्1, अन्य सभी सार्वजनिक तथा निजी ऋणों के लिए किया जाए उनके लिए वह वैध मुद्रा हो। क्योंकि प्रत्येक गिरावट के साथ-साथ इन डालरों के धात्वीय मूल्य में भी गिरावट आती थी, जबकि उनका वैध मूल्य पहले की तरह ही रहता था। अतः वे थ्रेलर तथा फ्रेंक की तरह, अधिमूल्य वाले सिक्के हो गए थे। यह बात स्पष्ट है ख्2, कि जब किसी देश की मुद्रा का भंडार सब कार्यों के लिए समान रूप में अच्छा न हो तो उसकी स्थिति असंतोषजनक कहलाती है। यद्यपि ये सिक्के आंतरिक कार्यों के लिए तो अच्छे थे, परन्तु अंतर्राष्ट्रीय भुगतान के लिए व्यर्थ थे उन्होंने समूची मुद्रा प्रणाली को अस्थिर तथा अत्यंत भारी बना दिया, इसके अलावा वे बैंकिंग निधि(रिजर्व) का कार्य करने व उद्देश्य की पूर्ति के योग्य नहीं बन सके। आधुनिक समय में बैंकिंग निधि (रिजर्व) का कार्य करना धात्वीय मुद्रा का प्रथम कार्य है। उनके कारण अवैध सिक्के ढलाई की संभावनाएं बहुत अधिक बढ़ गईं। परन्तु उनका अस्तित्व-संकट का ऐसा स्रोत/साधन कैसे बना, उसका कारण यह था कि इन देशों के कुल धात्वीय मुद्रा का एक बड़ा भाग इस प्रकार का था। तालिका XXIII में आटोमर हॉफट द्वारा दिए
| Col1 | Rkkfydk& XXIII fofHkUu ns'kksa esa eqnzk ds HkaMkj (LVkWd) dk forj.k· | Col3 | Col4 | Col5 | Col6 |
|---|---|---|---|---|---|
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~~ 1892 ds izkjaHk esa #i;s dhs eqnzk dk ifjpkyu~~ | ~~ 1892 ds izkjaHk esa #i;s dhs eqnzk dk ifjpkyu~~ | ~~ 1892 ds izkjaHk esa #i;s dhs eqnzk dk ifjpkyu~~ | ~~ 1892 ds izkjaHk esa #i;s dhs eqnzk dk ifjpkyu~~ | ~~ 1892 ds izkjaHk esa #i;s dhs eqnzk dk ifjpkyu~~ |
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~~ [kaMkRed eqnzk~~ | ||||
| vkLVªsfy;k¾iQyksfju baXySaM¾ikmaM IkzQkal¾IkzQSad teZuh¾,d (ekdZ) gkySaM¾Ýyksfju bVyh¾yhjk :l¾ikmaM Lisu¾islVk ;w,l, ¾Mkyj |
65]000]000 118]000]000 3]900]000]000 2]500]000]000 64] 000]000 485] 000]000 59]500]000 160] 000]000 671] 000]000 |
197]000]00 &&&& 3]200]000]000 430] 000]000 135] 000]000 81] 000]000 &&&& 646] 000]000 458] 000]000 |
601]000]000 10] 000]000 572]000]000 450]000]000 98] 000]000 847]000]000 51]200]000 548]000]000 419]000]000 |
40]000]000 26] 000]000 280]000]000 457]000]000 7]600]000 150]000]000 8]200]000 190]000]000 77]000]000 |
14]000]000 1]900]000 280]000]000 57]000]000 1]800]000 75]000]000 1]000]000 157]000]000 18]000]000 |
ऽओटोमर हॉफट द्वारा दिए गए आंकड़ों (लंदन, इफींथम, विल्सन और कंपनी 1892 पृ. 160
- मानेटरी कमीशन ऑफ दि इंडियानापोलिस कान्वेंशन, शिकागो, की रिपोर्ट -1898 पृ., 138-45
- 1881 की अंतर्राष्ट्रीय मानेटरी कान्फ्रेंस में नीदरलैंड के प्रतिनिधि प्रो. पियरसन का भाषण, संयुक्त राज्य,
सिनसिनाती के प्रतिनिधियों की रिपोर्ट, 1881, पृ. 77.84