4. स्वर्ण मानक की ओर - Page 163

148 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

तालिका- XXIV

फ्रांस में सोने तथा चांदी के सिक्कों की ढलाईऽ

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1803 ls 1820­
1821 ls 1847­
1848 ls 1852­
1853 ls 1856­
1857 ls 1866­
1867 ls 1873­
868­
301­
448­
1]795­
3]516­
876­
1]091­
2]778­
543­
102­
55­
587­
1% 15-58­
1% 15-80­
1% 15-67­
1% 15-35­
1% 15-33­
1% 15-62­

ऽ यह तालिका नीदरलैंड के प्रतिनिधि एम.पियरसन द्वारा 1881 के पेरिस अंतर्राष्ट्रीय मानीटरी सम्मेलन में

प्रस्तुत की गई थी।

इसकी न्यूनीकरण में द्विधातुवादियों के पास देने के लिए कोई चीज नहीं थी। इसमें संदेह नहीं कि उस समय ऐसी योजनाएं थीं जैसी एक योजना प्रो. मार्शल द्वारा प्रस्तावित की गई थी। इसमें कुछ उस निश्चित अनुपात ख्1, में सोने तथा चांदी से जुड़ी छड़ों पर आधारित कागजी मुद्रा थी। इसका उद्देश्य इसे ‘‘दोनों में से एक धातुवाद को दोहरे-धातुवाद’’ में बदलना था। परन्तु ऐसी योजना को छोड़कर, द्विधातुवाद की मुक्त सिक्का व निश्चित अनुपात योजना को वितरण में प्रत्यावर्तन के प्रति कोई गारंटी नहीं दी। वास्तव में, उस योजना के अंतर्गत प्रत्यावर्तन या एकान्तरण उस क्रिया विधि की आत्मा है जो अनुपात को अव्यवस्थित होने से बचाती है। इसके न्यूनीकरण में द्विधातुवादी केवल एक यह बात कह सकते थे कि ख्2, मुद्रा में एकान्तरण व प्रत्यावर्तन केवल बैंक निधि (बैंक रिजर्व) तक ही सीमित रहेगा और वह लोगों की जेबों तक नहीं जाएगा। यह केवल एक बहानेबाजी थी ख्3, क्योंकि बैंक, लोगों के पूर्वाग्रहों के अनुरूप होने के अलावा अपनी निधि की व्यवस्था कैसे कर सकते थे? यहां तक कि सोने तथा चांदी का एक निश्चित अनुपात में प्रयोग करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समझौता भी इस बात की कोई गारंटी नहीं था कि इस समवर्ती परिचालन को बनाए रखा

  1. मार्च, 1887 के लिए समकालीन पुनरीक्षण। इस बात को नोट करना रोचक है कि वास्तव में यही

योजना का सुझाव प्रो. मार्शल से 115 वर्ष पहले जेम्स स्टीवर्ट द्वारा उस समय दिया गया था जब ईस्ट

इंडिया कंपनी ने उसका परामर्श इस प्रश्न पर लिया था कि उस समय बंगाल की अव्यवस्थित मुद्रा को

सुधारने का क्या तरीका है। उसने इसके लिए कंपनी पर दबाव नहीं दिया क्योंकि उसका विचार था कि

‘‘सभी मानव दार्शनिक नहीं होते’’ उसकी कृति प्रिंसिपल्स ऑफ मनीएज एल्टलाइड टू दि प्रेजेन्ट ऑफ

दि कॉमन ऑफ बंगाल (द्वितीय संस्करण, 1772) पृ.8-11 विलियम वार्ड द्वारा बैंक स्टाक ऑफ लंदन

को संबोधित एक पत्र में ‘‘ऑन मोनेटरी डिरेजमेंट 1840 पृ.8 में था

  1. प्रो. फोक्सवैल, आक्सफोर्ड इकोनॉमिक रिव्यू, 1893 वाल्यूम 3, पृ. 297

  2. प्रो. केनन द्वारा उत्तर वही-पृ.457