160 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
संयुक्त राज्य के लाभ के लिए आग की भट्टी में अपने हाथ खतरे में डाले? इन प्रस्तावों पर टिप्पणी करते हुए भारत सरकार ने यह अवलोकन किया ख्1, ।
‘‘महारानी की सरकार के समक्ष प्रस्तावित व्यवस्था में शामिल परितर्वन निम्नलिखित हैंःµ फ्रांस तथा संयुक्त राज्य को अपनी टकसालें खोलनी हैं जहां वे चांदी के सिक्के ढालने के लिए स्वतंत्र हों, सोने के मुक्त सिक्के बनाना जारी रखना तथा दोनों धातुओं के सिक्कों की असीमित वैध मुद्रा बनाना। इनका अनुपात फ्रांस में अपरिवर्तनी बना रहेगा और संयुक्त राज्य में 15 ½ ः1 के फ्रांसीसी अनुपात में परिवर्तित होगा। भारत को अपनी टकसाल चांदी के लिए खोलनी होगी और उनको सोने के लिए बंद रखना होगा और यह वचन देना होगा कि सोने को वैध मुद्रा नहीं बनाया जाएगा। इस प्रकार फ्रांस तथा संयुक्त राज्य द्विधातुक होंगे, भारत एक धात्विक (चांदी) होगा जबकि विश्व के अधिकांश अन्य देश एक धात्विक (सोना) होंगे।
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इन प्रस्तावित उपायों का पहला परिणाम यदि वे अस्थाई रूप से भी अपने उद्देश्यों में सफल होते हैं, तो यह होगा कि भारतीय व्यापार तथा उद्योग की बहुत बड़ी अव्यवस्था होगी यह अव्यवस्था रुपये में लगभग 16 पैंस से लगभग 23 पैंस तक की अचानक वृद्धि के कारण होगी। ऐसी वृद्धि हमारे निर्यात व्यापार को कम से कम कुछ समय के लिए समाप्त करने के लिए पर्याप्त होगी। ऐसी व्यवस्था जैसा कि प्रस्तावित की गई है, भारत के लिए अन्य दो देशों में से किसी की भी अपेक्षा अनन्तरूप में अधिक गंभीर होगी। क्योंकि यह बात साफ प्रतीत होती है कि व्यावहारिक रूप में असफलता से घोर संकट का सारा खतरा केवल भारत के लिए होगा। यदि समझौता भंग हो गया और समाप्त हो गया तो तीन देशों में से प्रत्येक देश के लिए क्या होगा फ्रांस के पास सोने का एक विशाल भंडार है और संयुक्त राज्य भी अधिकतर उसी स्थिति में है जैसी स्थिति में फ्रांस है, यद्यपि उस धातु का भंडार अधिक विशाल नहीं है। यह स्वीकार किया जा सकता है, कि यदि कोई सावधानी न बरती गई, तो सोने का यह भंडार (रिजर्व) समझौते के लागू होने से लुप्त हो सकता है और उस स्थिति में, यदि प्रयोग अंततः असफल हो गया तो संबंधित दो देशों को बहुत बड़ी हानि होगी? परन्तु यह बात कल्पनातीत है कि सब घटनाओं के संबंध में सावधानी नहीं बरती जाएगी। अतः स्वर्ण भंडार के निःशेष का खतरा दिखाई देगा और इसलिए यह संभव है कि फ्रांस या संयुक्त राज्य की मुद्रा प्रणाली में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होगा। इस समझौते का एकमात्र प्रभाव चांदी का सिक्का बनाना होगा जो समझौते के समाप्त होने के साथ ही समाप्त हो जाएगा। इस प्रकार यदि प्रयोग असफल हो गया तो असफलता के सारे व्यय का वहन भारत द्वारा किया जाएगा। यहां रुपये में बड़ी तेजी से वृद्धि होगी, इसमें कुछ समय तक दृढ़ता रहेगी और फिर जब उसका पतन होगा तो वह सिर के बल
1 सेक्रेट्री ऑफ स्टेट का 16 सितम्बर, 1897 का पत्र पृष्ठ 9 टेढ़े अक्षर मूल में नहीं है।