164 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इसके विपरीत, श्री लिंडसे ने श्री प्रोबीन द्वारा अपनाए गए मार्ग से बिल्कुल अलग किसी सीमा के भारत में रुपये हुंडी (ड्राफटस) 16मार्ग का अनुसरण किया। उसने यह प्रस्तावित किया ख्1, ख्1, कि एक ओर सरकार को बिना / 16 पैंस (डी) रुपये के बदले और दूसरी ओर लंदन में पाउंड हुंडी (ड्राफट) 15 - पैंस (डि) रुपये के बदले बेचने के लिए आवश्यक निधियों (फंडों) को लंदन तथा भारत में ‘‘स्वर्णमान’’ कार्यालयों में सरकार की साधारण बकाया राशि से अलग रखना था। लंदन कार्यालय के पास उसको दी गई हुंडियों (ड्राफटस) का भुगतान करने के लिए निम्न प्रकार से निधि फंड सुरक्षित रखनी थीµ
पांच या दस मिलियन पाउंड तक सोने में उधार लेकरः
भारत पर हुंडी (ड्राफट्स) की बिक्री द्वारा वसूल की गई प्राप्तियों (रसीदों) द्वारा_
पिघलाए गए रुपये में चांदी बुलियन की बिक्री द्वारा वसूल ख्2, की गई प्राप्तियों
रसीदों ख्1, द्वारा_ और
- जब आवश्यक हो तो और सोना उधार लेकर भारतीय स्वर्णमान कार्यालय के
पास, उसको दिए गए ड्राफटों (हुंडियों) को चुकाने व भुगतान करने के लिए
निधि (फंड) को सुरक्षित रखना थाµ
(1) लंदन पर हुंडियों (ड्राफटस) की बिक्री द्वारा वसूल की गई प्राप्तियों द्वारा, और
(2) जब आवश्यक हो तो लंदन स्वर्णमान वाले कार्यालय द्वारा खरीदी तथा भारत
में प्रेषित बुलियन से सिक्के बनाना।
भारत सरकार द्वारा समर्थन प्राप्त मुद्रा की योजना तथा दूसरी ओर सर्वश्री प्रोबीन तथा लिंडसे द्वारा प्रस्तुत योजना के बीच मुख्य अंतर यह था कि भारत ने स्वर्ण मुद्रा के साथ स्वर्णमान स्थापित करना प्रस्तावित किया था जबकि उन दोनों ने स्वर्ण मुद्रा के बिना स्वर्णमान स्थापित करना प्रस्तावित किया था।
स्वर्ण मुद्रा सहित स्वर्णमान तथा स्वर्ण मुद्रा के बिना स्वर्णमान के तुलनात्मक गुणों का निर्णय देने के लिए सेक्रेटरी ऑफ स्टेट ने एक और विभागीय समिति की नियुक्ति की। इस समिति की अध्यक्ष सर हेनरी पावलर को बनाया गया। सारी महत्वपूर्ण साक्ष्य लेने के बाद, समिति ने यह अवलोकन किया ख्3, ःµ
- उसकी योजना का प्रारंभिक विस्तारपूर्ण उल्लेख अक्तूबर 1878 के कलकत्ता रिव्यू में मिलता है। यह
उसके लेख ‘‘इंग्लैंड तथा भारत में स्वर्ण के सिक्कों के बिना स्वर्णमान (ए गोल्ड स्टेन्डर्ड विदाउट ए
गोल्ड थोपनेज इन इंग्लैंड इंडिया) और सबसे बाद में रिकार्डो का विनिमय उपाय इफिंघम विल्सन,
1892 नामक पैम्पलेट में दिया गया। इस योजना को दिनांक 6 जनवरी, 1898 में ‘‘पायनियर ऑफ
इलाहाबाद (भारत) नाम समाचार पत्र में और आगे विकसित किया गया था। इससे पूर्ण उद्धरण 1898
के पत्रा. पृ.13 में दिए गए हैं।
- श्री लिंडसे ने यह विचार किया है कि जब लंदन पर सोने की हुडियों की मांग इतनी अधिक हो गई
जो उसकी आवश्यकता को सूचित करती है। रुपये की मुद्रा के आकार को संकुचित कर दिया जाए।
यह कार्य रुपये को पिघलाकर और चांदी को ‘‘स्वर्णमान’’ कार्यालय लंदन में जमा होने वाले सोने के
बदले बेचकर किया जाना चाहिए।
- भारतीय मुद्रा की जांच करने हेतु नियुक्त समिति का प्रतिवेदन पी.पी.सी. 9390-1899 का पृष्ठ 15