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स्वर्ण मानक की ओर

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के सिक्कों का निर्माण करने के लिए भारत में एक टकसाल का होना आवश्यक है? ट्रेजरी ने यह तर्क दियाःµ

‘‘इस बात पर अपनी संतुष्टि प्रकट करते हुए कि अब समझौता हो गया है, यह समिति यह वांछनीय समझती है कि इस योजना को लागू करने से पहले लार्ड जॉर्ज हैमिल्टन से यह अनुरोध किया जाए कि वे भारत में सॉवरेन के निर्माण के पक्ष में दिए गए तर्कों की समीक्षा करें और इस बात पर विचार करें कि जब यह प्रस्ताव किया गया था तबसे दो वर्ष गुजर गए हैं, क्या इन दो वर्षों के दौरान घटना क्रम से उनकी उपदेयता कम तो नहीं है। और वह उन ऐसे लाभों को बताएं व प्रस्तुत करें जो लाभ एक ऐसी शाखा टकसाल की स्थापना से होंगे और क्या उस पर किये जाने वाले खर्च का अनुपात अधिक तो नहीं होगा.....। अब स्वर्णमान दृढ़ता से स्थापित हो गया है और जनता को भारतीय सरकार की उनकी नीति पर जो विवाद से परे है वापिस न लौटने के इरादे व इच्छा के संबंध में किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है। वर्तमान परिस्थितियों में जब भी आवश्यकता होती है, तभी सॉवरेन तत्काल खिंचे चले आते हैं..... इसके विपरीत भारत सरकार द्वारा, उस देश में सिक्कों के निर्माण के लिए उपलब्ध सोने के संबंध में जो अनुमान लगाए गए हैं व आकलन किये गये हैं वे पूर्वानुमानों से कम हैं। और न उसमें कुछ समय तक किसी भी तरह की अधिक वृद्धि होने की आशा भी है।

वर्ष के अधिकांश समय तक कर्मचारी खाली बैठे रहेंगे जिससे भारतीय खजाने पर

खर्च का अत्यधिक बोझ होगा। अब वास्तव में इस बात का निर्णय लॉर्ड जॉर्ज हैमिल्टन को करना है कि क्या इन आपत्तियों के बावजूद भी इस योजना पर कार्रवाई की जाए।’’

भारत कार्यालय (इंडिया ऑफिस) ने उत्तर दियाः- ‘‘सोने के सिक्के बनाने के लिए भारत में एक टकसाल की स्थापना, एक नई मुद्रा प्रणाली की निष्पत्ति का एक सबसे स्पष्ट बाह्य संकेत है और अब इस प्रस्ताव को रद्द करने से लोगों का ध्यान इस ओर जाएगा और उसमें उनसे आलोचना तथा बैचेनी उत्पन्न होगी..... यह स्कीम अब जिस अवस्था में पहुंच गई है उसमें अब इसे रद्द करने में लॉर्ड की काई रुचि नहीं है।’’

ट्रेजरी ने एक जबरदस्त व कड़ा उत्तर भेजा, उसमें उसने यह कहाः-

‘‘भारतीय मुद्रा की आवश्यकताओं की पूर्ति अन्य स्रोतों से कर दी जाती है और स्थानीय रूप में, सॉवरेन के सिक्के निर्माण के लिए वास्तव में कोई मांग नहीं है.... यदि कोई विश्वास नहीं कर सकता कि भारत में सोने के सिक्कों को प्राप्त करने के लिए मशीनों की व्यवस्था करने से भारत में सोने की स्थिति मजबूत होगी या सरकार के इरादे के प्रति जनता का विश्वास जगेगा पहले से जो विश्वास जमा हुआ है उसका उपाय समिति की रिपोर्ट के समय से विनिमय के तरीके से पर्याप्त मात्रा में परिलक्षित होता है और जिस तत्परता से सोना भारत में जलयानों द्वारा भेजा जाता