5. स्वर्ण मानक से स्वर्ण विनिमय मानक तक - Page 189

174 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

यही प्रणाली चल रही है। यहां पर यह ध्यान देने योग्य है कि मि.लिंडसे के प्रस्ताव जो 1898 में रद्द कर दिए गए थे उन्हीं प्रस्तावों के अनुरूप भारत सरकार ने दो सुरक्षित भंडार बनाए हैं- एक स्वर्ण का और दूसरा रुपयों काµजो नकद अधिशेष, कागजी मुद्रा और स्वर्ण प्रतिमान सुरक्षित भंडार से बनाए गए हैं। मुद्रा प्रणाली की प्रकृति को देखते हुए ये दोनों मिश्रित हैं। नकदी अति दोष जो राजस्व की प्राप्तियों से मिलते हैं, शुद्ध रुपयों में और स्वर्ण मुद्रा में एकत्र होते हैं। और दोनों ही वैध मुद्रा हैं। उन दोनों के बदले नोट जारी किए जाते हैं। इसलिए कागजी मुद्रा की निधि या भंडार में स्वर्ण मुद्रा और रुपये दोनों ही रहते हैं। अगस्त 1915 तक स्वर्ण प्रतिमान आरक्षित निधि का भी कुछ भाग स्वर्ण में और कुछ रुपयों में रखा जाता था। ख्1, छंटाई या सार्टिंग की एक प्रणाली द्वारा जिसे तकनीकी भाषा में ‘‘अंतरण या ट्रांसफर’’ कहा जाता है, सरकार को रुपयों और स्वर्ण मुद्रा पर अधिकार मिल जाता है जिससे वह अपने दायित्वों को पूरा कर सकती है। इन विधियों के स्थान भी वही है जैसे मि. लिंडसे ने सुझाए थे। नकद अधिशेष अर्थात् सरकार का तिजोरी धन अनिवार्यतः भारत में भारत सरकार के पास और लंदन में भारत सचिव (सेक्रेटरी ऑफ स्टेट) के पास जो हिस्सा होता है वह पूरा का पूरा सोने में होता है और भारत सरकार के पास चांदी में। नकद अधिशेषों की तरह स्वर्ण प्रतिमान आरक्षित निधि अनुविहित आरक्षित निधि नहीं है। फलतः इसके स्थान का फैसला करना कार्यपालिका के हाथ में रहता है। इस दशा में व्यवस्था इस प्रकार की गई है कि निधि का स्वर्ण भाग लंदन में भारत सचिव के पास और रुपया का भाग, जब तक उसे भारत सरकार रखे भारत में रहेगा। जिस आरक्षित निधि को आसानी से मुद्रा के हेर फेर से नहीं बदला जा सकता, वह है कागजी मुद्रा की आरक्षित निधि और इसका कारण यह है कि इसका स्थान और निपटान या स्थान कानून द्वारा निर्धारित है। इसे दृष्टि में रखते हुए ऐसी कानूनी शक्ति ले ली गई है कि सुरक्षित भंडार के स्वर्ण भाग का स्थान बदला जा सके और इसके लिए 1898 के अस्थायी अधिनियम II के उपबंध को स्थायी बना दिया गया है और इसके अंतर्गत यह अधिकृत किया गया है कि लंदन में भारत सचिव के पास विद्यमान स्वर्ण के बदले भारत में नोट जारी किए जा सकें। इस तरह मुद्रा की नई प्रणाली के अंतर्गत लंदन में भारत सचिव और भारत सरकार दो सुरक्षित भंडार रखते हैंµपहले सुरक्षित भंडार सोने का होता है जो मुख्यतः भारत सचिव के पास रहता है

  1. तब से रूपया शाखा को चैम्बरलेन कमीशन की सिफारिशों के आधार पर बंद कर दिया गया है।

इसके अतिरिक्त भी, यदि सरकार के पास रुपयों की कमी हो जाए, तो उसे इस बात की कानून शक्ति

प्राप्त है कि कागजी मुद्रा आरक्षित निधि के रूप में उसके पास जो स्वर्ण है उसे रुपयों में तब्दील करके

रुपयों का स्टाक पूरा कर लें।