स्वर्ण मानक से स्वर्ण विनिमय मानक तक
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इतना रहता है कि मुद्रा जारी करने के अधिकार का प्रयोग एक में अधिक
सावधानीपूर्वक और बुद्धिमानीपूर्वक किया जाता है जबकि दूसरे में कम
बुद्धिमानीपूर्वक। दूसरे शब्दों में परिवर्तनीयता मुद्रा जारी करने के अधिकार
पर रोक का काम करती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए और इस तथ्य
को भी ध्यान में रखते हुए कि गलत व्यवस्था करने से परिवर्तनीय मुद्रा
भी अपरिवर्तनीय बन जाती है, हम यह समझ सकते हैं कि परिवर्तनीयता
का यह दायित्व निभाना कितना कठिन होता है कि मुद्रा का प्रबंध इतनी
बुद्धिमानी से किया जाए कि बिना समझ के किए गए प्रबंध से जरूरत से
ज्यादा मुद्रा जारी न हो जाए। इसलिए यदि यह सच है कि परिवर्तनीय मुद्रा
वाले देशों में मुद्रा की व्यवस्था इतनी बुद्धिमानीपूर्वक चलाई जाती है, कि
जब एक देश से स्वर्ण व चांदी की मुद्रा चली जाती है, तो उसकी जगह
लेने के लिए कागजी नोट जारी नहीं किए जाते बल्कि आमतौर पर उनकी
मात्रा स्वर्ण मुद्रा की अपेक्षा अधिक मात्रा में घटा दी जाती है। ऐसा इसलिए
किया जाता है कि परिवर्तनीयता का दायित्व ‘‘प्रभावकारी, निर्बाध तथा
तालालिक’’ परिवर्तनीयता से होता है। ख्1,
अब हम प्रो. सुमनेर के इन शब्दों का तात्पर्य अच्छी तरह समझ सकते हैं ख्2, ःµ
‘‘मुद्रा की परिवर्तनीयता मनुष्य के अंतर्विवेक की तरह होती हैः इसकी कई श्रेणियां होती हैं और यह उसी अनुपात में मूल्यवान होती है जितनी यह अनमनीय और शुद्ध होती है।’’
इस परिस्थिति में यह मान लेना मूर्खता होगी कि अपरिवर्तनीय मुद्रा का हम पर कोई प्रभाव ही नहीं पड़ेगा जब तक कि हमें यह पता न हो कि परिवर्तनीय मुद्रा किस श्रेणी की उपलब्ध है। अब भारत में रुपये की परिवर्तनीयता की क्या प्रकृति है? यह प्रिवर्तनीयता आस्थगित, गैर-विधिक, गैर-स्थानीयकृत और इस तरह गैर-शक्तिशाली किस्म की परिवर्तनीयता है। वास्तव में यह परिवर्तनीयता है ही नहीं, यह तो वास्तव में अधिस्थगन की तरह है जो परिवर्तनीयता को नकारने के समान है। व्यवहार में विदेशी प्रेषण की परिवर्तनीयता का क्या अर्थ होता है। इसका सीधा-सादा अर्थ यह होता है कि जब तक विनिमय दर नहीं गिरे, तब तक रुपये के मामले में अधिस्थगन औसत परिवर्तनशीलता बनी रहती है। यह अधिस्थगन केवल तब तक नहीं रहता जब तक विनिमय दर गिरे नहीं, बल्कि इस बात की भी कोई गारंटी नहीं होती कि
- प्रो. निकल्सन ने ‘वार फाइनेंस’ द्वितीय संस्करण, 1918 पृष्ठ 36 पर कहा कि कोई एक पूर्ण अर्थ नहीं
बता सकता।
- ए. हिस्ट्री ऑफ अमेरिकन करेंसी, न्यूयार्क -1874 पृष्ठ 116